Demat Accounts में रिकॉर्ड उछाल! जुलाई में खुले 28.9 लाख नए खाते, IPOs ने खींचा रिटेल निवेशकों को

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AuthorMehul Desai|Published at:
Demat Accounts में रिकॉर्ड उछाल! जुलाई में खुले 28.9 लाख नए खाते, IPOs ने खींचा रिटेल निवेशकों को

जुलाई 2026 में भारत में 28.9 लाख नए डीमैट खाते खोले गए, जो जनवरी के बाद की सबसे बड़ी संख्या है। इस दौरान 12 कंपनियों ने IPOs के जरिए ₹28,649 करोड़ जुटाए। Nifty 50 में 2% की तेजी और विदेशी निवेशकों की वापसी ने रिटेल निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

डीमैट खातों में आई बंपर तेजी

भारतीय शेयर बाजार में जुलाई 2026 में रिटेल निवेशकों की भागीदारी एक बार फिर बढ़ी है। इस महीने में 28.9 लाख नए डीमैट खाते खोले गए, जो पिछले छह महीनों का रिकॉर्ड है। देश में कुल डीमैट खातों की संख्या अब 23.44 करोड़ से ज्यादा हो गई है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि बड़ी संख्या में लोग शेयर बाजार में लौट रहे हैं, जिसका मुख्य कारण आईपीओ (IPO) की जोरदार गतिविधि है।

IPOs का रहा बोलबाला

जुलाई के महीने में कुल 12 कंपनियों ने अपने आईपीओ लॉन्च किए, जिनसे कुल ₹28,649 करोड़ जुटाए गए। इन नए आईपीओ ने नए निवेशकों को बाजार में आने के लिए काफी प्रोत्साहित किया, जो लिस्टिंग गेन या लंबी अवधि के निवेश की उम्मीद कर रहे थे। नए लिस्टिंग के अलावा, बाजार का माहौल भी सकारात्मक रहा। बेंचमार्क निफ्टी 50 (Nifty 50) इंडेक्स जुलाई में लगभग 2% बढ़ा, जिससे मौजूदा और नए निवेशकों को सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहन मिला।

विदेशी निवेशकों की वापसी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भी जुलाई में अपना रुख बदला और ₹20,200 करोड़ का निवेश कर वे नेट खरीदार बन गए। चार महीने की बिकवाली के बाद यह इनफ्लो बाजार को स्थिर करने और निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार साबित हुआ। आम निवेशक के लिए, यह एक स्वस्थ बाजार का संकेत है जहाँ रिटेल और संस्थागत, दोनों तरह का पैसा स्टॉक्स में आ रहा है।

जोखिम और समझदारी

डीमैट खातों में वृद्धि उत्साहजनक है, लेकिन निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। सभी आईपीओ सफल हों, यह जरूरी नहीं है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक अब ज्यादा समझदारी दिखा रहे हैं और केवल आईपीओ के लिए आवेदन करने के बजाय कंपनी के वैल्यूएशन, कमाई और मैनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। जैसे-जैसे ज्यादा लोग डीमैट खाते खोल रहे हैं, आईपीओ आवंटन के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, जिससे सबको अलॉटमेंट मिलने की संभावना कम हो सकती है।

निवेशकों को वैश्विक कारकों पर भी नजर रखनी चाहिए, जैसे भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी की कीमतों में बदलाव, जो बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। सिर्फ पिछले आईपीओ की सफलता के आधार पर भविष्य के बाजार का अनुमान लगाना भ्रामक हो सकता है, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदलती हैं।

आगे, बाजार कई बड़े आईपीओ का इंतजार कर रहा है, जिनमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का संभावित आईपीओ भी शामिल है, जिसने जून में ड्राफ्ट पेपर फाइल किए थे। साथ ही, जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) जैसी बड़ी कंपनियों से भी आईपीओ की उम्मीद है। ये आने वाले इश्यू डीमैट खातों की और वृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं। नए निवेशकों के लिए, आने वाले आईपीओ की गुणवत्ता, विदेशी निवेशकों के फ्लो की निरंतरता और निफ्टी 50 इंडेक्स की स्थिरता पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.