भारत सरकार ने फाइनेंशियल ईयर **2027** के पहले **5** महीनों में ही विनिवेश के जरिए **₹55,697 करोड़** जुटा लिए हैं। सरकार अपने **₹80,000 करोड़** के सालाना लक्ष्य के करीब पहुंच गई है, जिसमें ओएफएस (OFS) रूट ने बड़ी भूमिका निभाई है।
भारत सरकार ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में विनिवेश की रफ्तार काफी तेज कर दी है। महज 5 महीनों के भीतर ₹55,697 करोड़ का फंड जुटाना सरकार की मजबूत रणनीति को दर्शाता है। यह आंकड़ा सालाना बजट में तय किए गए ₹80,000 करोड़ के लक्ष्य का लगभग 70% है।
ओएफएस (OFS) रूट की कामयाबी
सरकार ने बाजार से पैसा जुटाने के लिए 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के रास्ते को चुना है, जो बेहद पारदर्शी और तेज है। हिंदुस्तान कॉपर के शेयर सेल में निवेशकों ने जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई और इश्यू 3.41 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसके बाद सरकार ने 'ग्रीनशू ऑप्शन' का इस्तेमाल कर 6% हिस्सेदारी बेची, जिससे सरकारी खजाने में ₹2,982 करोड़ आए।
इससे पहले LIC, Coal India, NHPC और General Insurance Corporation (GIC) जैसे दिग्गजों में हिस्सेदारी बेचकर भी सरकार ने अच्छा फंड जुटाया है। यह तरीका न केवल पैसा जुटाने में मददगार साबित हो रहा है, बल्कि मार्केट में सही प्राइस डिस्कवरी भी सुनिश्चित कर रहा है।
फिस्कल डेफिसिट और आर्थिक मजबूती
ये फंड सरकार के फिस्कल डेफिसिट को 4.3% के लक्ष्य पर सीमित रखने के लिए जरूरी हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सब्सिडी के दबाव को देखते हुए, विनिवेश से मिलने वाली नॉन-टैक्स रेवेन्यू आर्थिक स्थिरता के लिए अहम है।
आगे की राह: IDBI Bank पर नजरें
अभी भी ₹24,303 करोड़ का लक्ष्य पूरा करना बाकी है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं। अब मार्केट की निगाहें IDBI Bank के रणनीतिक निजीकरण पर हैं। यह ओएफएस रूट से अलग होगा और इसमें कानूनी और रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अगर मार्केट में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव रहा, तो भविष्य के विनिवेश पर असर पड़ सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
