भारत और अबू धाबी ने प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया है। इस साझेदारी से साल **2050** तक भारत की GDP में **9.8%** तक की बढ़त की उम्मीद है, जिसका सीधा असर FMCG, रिटेल और इंश्योरेंस सेक्टर पर पड़ेगा।
भारत और अबू धाबी ने 'हेल्थस्पैन' (Healthspan) यानी स्वस्थ जीवन के वर्षों को बढ़ाने के लिए एक नई साझेदारी का ऐलान किया है। McKinsey Health Institute और अबू धाबी के स्वास्थ्य विभाग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीमारी को रोकने पर ध्यान देने से ग्लोबल इकोनॉमी में ट्रिलियंस डॉलर जुड़ सकते हैं। भारत के लिए, रिएक्टिव हेल्थकेयर मॉडल से निकलकर प्रिवेंटिव मॉडल अपनाने से 2050 तक GDP में 9.8% का बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
FMCG सेक्टर पर रेगुलेटरी नजर
इस पार्टनरशिप का सबसे बड़ा असर फूड कंपनियों की लेबलिंग पर पड़ेगा। अबू धाबी में 'Nutri-Mark' सिस्टम लागू है, जहां खाने के पैकेटों पर A से E तक ग्रेड दिए जाते हैं। भारत भी अब ऐसी ही फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग पर विचार कर रहा है। जो कंपनियां कम शुगर या लो-फैट प्रोडक्ट बनाती हैं, उन्हें बाजार में बड़ा फायदा मिल सकता है, जबकि प्रोसेस्ड फूड बनाने वाली कंपनियों को अपनी रेसिपी बदलने और रिसर्च पर भारी खर्च करने का दबाव झेलना पड़ सकता है।
इंश्योरेंस और रिटेल में आएंगे बदलाव
रिटेल और इंश्योरेंस कंपनियां भी अपनी स्ट्रैटेजी बदल रही हैं। रिटेलर्स अब स्टोर लेआउट में बदलाव करके हेल्दी विकल्पों को चेकआउट काउंटर जैसी जगहों पर प्रमोट करेंगे। वहीं, इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह एक लंबी अवधि का फायदा है, क्योंकि बेहतर लाइफस्टाइल से भविष्य में हेल्थ क्लेम की संख्या कम होगी और उनका प्रॉफिट मार्जिन बेहतर हो सकता है।
निवेशकों को अक्टूबर 2026 में होने वाले 'अबू धाबी फ्यूचर हेल्थ समिट' पर नजर रखनी चाहिए, जहां इन बदलावों की रूपरेखा और अधिक स्पष्ट होगी। भारत में रेगुलेटरी संस्थाओं के अगले निर्देशों का इंतजार रहेगा, जो यह तय करेंगे कि कंपनियों को कितनी जल्दी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को नया रूप देना होगा।
