India ATF Demand: जुलाई में 2 साल का निचला स्तर, फ्लाइट्स में कटौती बनी बड़ी वजह

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
India ATF Demand: जुलाई में 2 साल का निचला स्तर, फ्लाइट्स में कटौती बनी बड़ी वजह

भारत में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की डिमांड जुलाई में घटकर **699,000 टन** रह गई, जो पिछले 2 सालों का सबसे निचला स्तर है। इसका मुख्य कारण प्रमुख एयरलाइंस द्वारा फ्लाइट्स में की गई बड़ी कटौती है। यह गिरावट एयरलाइंस की क्षमता में कमी और मॉनसून से जुड़ी दिक्कतों को दर्शाती है, जिसने इंडस्ट्री में तेज विस्तार के बाद फ्यूल की मांग को प्रभावित किया है।

फ्यूल की मांग में बड़ी गिरावट

भारत में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की डिमांड जुलाई 2026 में काफी कम हो गई। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, यह डिमांड घटकर 699,000 टन पर आ गई। यह जून की तुलना में 4% कम है और पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 1.5% की गिरावट है। यह दिसंबर 2023 के बाद ATF की खपत का सबसे निचला स्तर है।

फ्लाइट्स में कटौती का असर

ईंधन की खपत में इस गिरावट की मुख्य वजह घरेलू एयरलाइंस द्वारा अपनी फ्लाइट्स को कम करना है। एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम (Cirium) के अनुसार, जुलाई में अनुसूचित डोमेस्टिक फ्लाइट्स की संख्या 8.6% घटकर 82,437 रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 90,198 थी। इंटरनेशनल फ्लाइट्स में भी 6.7% की कमी आई और यह संख्या 35,366 दर्ज की गई।

एयर इंडिया ग्रुप, इंडिगो (IndiGo), स्पाइसजेट (SpiceJet) और अकासा एयर (Akasa Air) जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपनी फ्लाइट्स को काफी कम किया है। एयर इंडिया ने पिछले साल की तुलना में 3,100 से ज्यादा फ्लाइट्स कम कीं। इंडिगो ने 1,611 फ्लाइट्स, स्पाइसजेट ने 918 और अकासा एयर ने 262 फ्लाइट्स कम शेड्यूल कीं। फ्लाइट्स के इस घटाए गए शेड्यूल का सीधा असर ATF की मांग पर पड़ा है।

ऑपरेशनल चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

फ्लाइट्स में कटौती के अलावा, मॉनसून के आने से भी कई ऑपरेशनल दिक्कतें हुईं, जैसे फ्लाइट्स का लेट होना, डायवर्ट होना और कैंसिल होना। इन वजहों से भी फ्यूल की मांग कम हुई।

हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट पिछले दो सालों में हुई तेज विस्तार के बाद आई है। अब यह देखना अहम होगा कि क्या यह फ्लाइट्स में कटौती केवल मौसम और नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन का नतीजा है, या भारतीय एयरलाइंस अब ज्यादा सतर्क रुख अपना रही हैं। आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि मौसम ठीक होने के बाद फ्लाइट शेड्यूल वापस बढ़ता है या नहीं, और इस माहौल में एयरलाइंस के खर्च और पैसेंजर लोड फैक्टर पर क्या असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.