ASEAN-India Trade in Goods Agreement के रिव्यू पर गतिरोध बरकरार है। वित्त वर्ष **2026** में **$51.55 बिलियन** के बढ़ते ट्रेड डेफिसिट के कारण भारत अब 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' को लेकर सख्त रुख अपना रहा है, जिससे इस डील का समाधान **2027** तक टलने के आसार हैं।
फिलिपींस में 17 नवंबर को होने वाले आगामी India-ASEAN समिट से बड़ी उम्मीदें नहीं हैं। जानकारों का मानना है कि एग्रीमेंट के रिव्यू को लेकर जो पेच फंसा है, वह इतनी जल्दी सुलझने वाला नहीं है और बातचीत का दौर अगले साल तक खिंच सकता है।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
विवाद की सबसे बड़ी वजह ट्रेड गैप का लगातार बढ़ना है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत और ASEAN देशों के बीच कुल कारोबार $128.38 बिलियन रहा। इसमें भारत का एक्सपोर्ट महज $38.41 बिलियन रहा, जबकि इंपोर्ट $89.96 बिलियन तक पहुंच गया। यानी भारत को $51.55 बिलियन का भारी-भरकम ट्रेड डेफिसिट झेलना पड़ रहा है।
भारत का 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' पर फोकस
भारत को डर है कि चीन जैसे देशों का माल दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के रास्ते भारत में सस्ते टैरिफ पर खपाया जा रहा है। सरकार चाहती है कि 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' को इतना सख्त किया जाए कि केवल उसी क्षेत्र में बने उत्पाद ही कम ड्यूटी का लाभ उठा सकें। अगर यह नियम सख्त होते हैं, तो टेक्सटाइल, केमिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की घरेलू कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि उन्हें सस्ते विदेशी माल से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
फिलहाल, जकार्ता में हुई 15वीं AITIGA जॉइंट कमेटी की मीटिंग में भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। अब निवेशकों की नजरें अगली बैठक पर हैं, जो जनवरी 2027 में भारत में होनी है। तब तक ट्रेड डेफिसिट के आंकड़े और चीन से होने वाली डंपिंग पर सरकार के प्रशासनिक कदमों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
