भारत में AI जॉब्स का बूम: 2.6 गुना बढ़ी नौकरियां, पर फ्रेशर्स के लिए घटी एंट्री-लेवल पोस्ट्स

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत में AI जॉब्स का बूम: 2.6 गुना बढ़ी नौकरियां, पर फ्रेशर्स के लिए घटी एंट्री-लेवल पोस्ट्स

एक नई नोमुरा (Nomura) रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2022 से 2026 के बीच AI से जुड़ी 83,100 नई नौकरियां पैदा हुईं, जबकि 31,921 नौकरियां खत्म हुईं। यह 2.6:1 का अनुपात पॉजिटिव ग्रोथ दिखाता है, लेकिन यह खास तकनीकी भूमिकाओं पर जोर दे रहा है, जिससे फ्रेशर्स के लिए एंट्री-लेवल जॉब्स के अवसर कम हो सकते हैं और स्किल्स गैप बढ़ सकता है।

AI का बदलता रोज़गार बाज़ार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत में रोज़गार के स्वरूप को तेजी से बदल रहा है। नोमुरा (Nomura) की एक नई रिपोर्ट इस बदलाव की तस्वीर साफ करती है। 2022 से अगस्त 2026 के बीच, रिपोर्ट ने एशिया भर में AI से जुड़ी रोज़गार की 69 केस स्टडीज़ का विश्लेषण किया। इसके अनुसार, भारत में ऑटोमेशन और छंटनी के कारण 31,921 नौकरियों के नुकसान की तुलना में AI से संबंधित 83,100 नई नियुक्तियां दर्ज की गईं। यह 2.6:1 का हायरिंग रेशियो दिखाता है कि AI वर्तमान में नौकरियों को खत्म करने से ज़्यादा पैदा कर रहा है।

नौकरियों का बदला पैटर्न

यह रोज़गार वृद्धि सभी स्तरों पर नहीं हो रही है। नौकरियों में जो कमी देखी जा रही है, वह मुख्य रूप से कस्टमर सपोर्ट, डेटा एंट्री और बेसिक प्रोसेसिंग जैसे रूटीन कामों में है, जहाँ कंपनियां अब चैटबॉट्स और ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके विपरीत, जो नई नौकरियां बन रही हैं, वे अत्यधिक तकनीकी (highly technical) हैं। कंपनियां खास तौर पर AI प्रोजेक्ट्स के लिए ग्रेजुएट्स और प्रोफेशनल्स की तलाश कर रही हैं, जैसे कि इन स्मार्ट सिस्टम्स को बनाना और मैनेज करना। इसका मतलब है कि नौकरियों की कुल संख्या बढ़ सकती है, लेकिन काम का स्वरूप सरल, दोहराए जाने वाले कार्यों से हटकर जटिल, विशेष तकनीकी विकास की ओर बढ़ रहा है।

दो-स्तरीय श्रम बाज़ार का खतरा

भले ही हेडलाइन के आंकड़े नौकरियों के सृजन को नुकसान से ज़्यादा दिखाते हैं, लेकिन यह एक बड़ी संरचनात्मक समस्या को छिपा रहा है। रिपोर्ट टेक्नोलॉजी सर्विसेज़ सेक्टर में एक 'दो-स्तरीय श्रम बाज़ार' (two-tier labor market) के उदय की पहचान करती है। इस व्यवस्था में, AI स्किल्स वाले अनुभवी प्रोफेशनल्स की मांग ज़्यादा है और उन्हें अच्छी सैलरी मिल रही है। वहीं, एंट्री-लेवल की भूमिकाएं—जो ऐतिहासिक रूप से हज़ारों भारतीय IT ग्रेजुएट्स के लिए शुरुआती बिंदु रही हैं—ऑटोमेशन के कारण दुर्लभ होती जा रही हैं। यह युवा नौकरी चाहने वालों के लिए एक मुश्किल स्थिति पैदा करता है। भले ही नई पोजीशन खुल रही हैं, लेकिन सपोर्ट रोल्स में नौकरी खो चुके लोगों के पास अक्सर नई AI-केंद्रित रिक्तियों को भरने के लिए ज़रूरी एडवांस्ड डिग्री या टेक्निकल ट्रेनिंग की कमी होती है। मौजूदा स्किल्स और नई अर्थव्यवस्था की ज़रूरतों के बीच यह मिसमैच कार्यबल के लिए एक बड़ी चुनौती है।

निवेशकों के लिए नज़र रखने योग्य बातें

IT और टेक्नोलॉजी सर्विसेज़ सेक्टर पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए इस ट्रेंड का वित्तीय प्रभाव काफी महत्वपूर्ण है। कंपनियां अपनी हायरिंग रणनीति को क्वालिटी और स्पेशलाइजेशन पर केंद्रित कर रही हैं, जिससे एंट्री-लेवल की भारी भर्ती की ज़रूरत कम होने पर प्रॉफिट मार्जिन बदल सकते हैं। हालांकि, अत्यधिक कुशल, स्पेशलाइज्ड टैलेंट पर निर्भरता सीनियर और एक्सपर्ट रोल्स के लिए वेज कॉस्ट (wage costs) बढ़ा सकती है। आने वाली तिमाहियों में ट्रैक करने वाला मुख्य कारक यह होगा कि कंपनियां अपनी कॉस्ट स्ट्रक्चर को कैसे संतुलित करती हैं और अपने मौजूदा कर्मचारियों के लिए री-स्किलिंग प्रोग्राम्स को कितनी प्रभावी ढंग से प्रबंधित करती हैं। यदि स्किल्स गैप बढ़ता है, तो स्पेशलाइज्ड टैलेंट के लिए रिक्रूटमेंट कॉस्ट बढ़ सकती है और कंपनियों पर अपने वर्तमान कर्मचारियों और भविष्य की ज़रूरतों के बीच के अंतर को पाटने के लिए ट्रेनिंग में ज़्यादा निवेश करने का दबाव पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.