भारत का 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड **7.05%** पर स्थिर बना हुआ है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रिकॉर्ड ऑफशोर इन्फ्लो के चलते भारतीय रुपये को सहारा मिला है। अब निवेशकों की नजरें अक्टूबर में होने वाली RBI की पॉलिसी मीटिंग पर हैं।
राहत की खबर: तेल और बॉन्ड का हाल
सितंबर की 22 तारीख को भारत का बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 7.0498% पर खुला, जो पिछली क्लोजिंग के मुकाबले स्थिर है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत की बात यह है कि ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक हलचल और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई सामान्य रहने से चिंताएं कम हुई हैं।
रुपये में आई मजबूती
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 6 पैसे मजबूत हुआ है। इसका मुख्य कारण ऑयल की कीमतों में गिरावट और US ट्रेजरी यील्ड का नरम पड़ना है। साथ ही, $133 बिलियन के रिकॉर्ड ऑफशोर बैंकिंग डिपॉजिट ने भी करेंसी को मजबूती दी है। ट्रेडर्स के अनुसार, डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट का अगला सपोर्ट 95.50 के पास है। अगर यह 95.70 के नीचे ट्रेड करता है, तो यह 95.00 के स्तर तक फिसल सकता है।
RBI की पॉलिसी और रेट हाइक का डर
अब सबकी नजरें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अक्टूबर की बैठक पर टिकी हैं। ग्लोबल स्तर पर चल रहे रेट हाइक के माहौल के बीच, CME FedWatch टूल के अनुसार अमेरिका में अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़कर 56% हो गई है। Natixis के जानकारों का मानना है कि रुपये को सहारा देने के लिए RBI साल 2026 तक कुल 50 बेसिस पॉइंट्स तक का रेट हाइक कर सकता है।
