10-Year Bond Yield: सरकारी बॉन्ड यील्ड में उछाल, 7% के करीब पहुंची दर; जानें क्या है आपके लिए मतलब

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
10-Year Bond Yield: सरकारी बॉन्ड यील्ड में उछाल, 7% के करीब पहुंची दर; जानें क्या है आपके लिए मतलब

भारत की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर **6.98%** के स्तर पर पहुंच गई है, जो अब **7%** के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी करीब है। बैंकिंग सिस्टम में **₹7.76 लाख करोड़** की रिकॉर्ड लिक्विडिटी होने के बावजूद ग्लोबल मार्केट के दबाव से यील्ड में यह तेजी देखी जा रही है।

भारत में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड बुधवार, 2 सितंबर 2026 को 6.98% के स्तर पर पहुंच गई है। यह दर सरकार द्वारा 10 साल के कर्ज पर चुकाए जाने वाले ब्याज को दर्शाती है। जब यह यील्ड बढ़ती है, तो इसका सीधा संकेत अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों के बढ़ने का होता है, जो कॉर्पोरेट लोन से लेकर आम आदमी के रिटेल लोन तक को प्रभावित करता है।

लिक्विडिटी का विरोधाभास

बाजार के जानकारों के लिए यह एक अजीब स्थिति है। आमतौर पर, जब बैंकिंग सिस्टम में ₹7.76 लाख करोड़ की भारी नकदी हो, तो यील्ड में गिरावट आनी चाहिए। लेकिन इस बार ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता, खास तौर पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का दबाव भारतीय कर्ज बाजार पर भारी पड़ रहा है। ये वैश्विक कारक स्थानीय स्तर पर मौजूद सरप्लस लिक्विडिटी के असर को बेअसर कर रहे हैं।

RBI का बैलेंसिंग एक्ट

इस सरप्लस लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार सक्रिय है। नकदी का स्तर चार साल के उच्चतम स्तर पर होने के कारण, RBI 'वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो' (VRRR) ऑक्शन के जरिए सिस्टम से एक्स्ट्रा पैसा खींच रहा है। हाल ही में हुए ऑक्शन में केंद्रीय बैंक ने ₹4.59 लाख करोड़ की लिक्विडिटी को सोखा है। इस कदम का मकसद ओवरनाइट कर्ज की लागत में बेवजह की अस्थिरता को रोकना है।

7% का स्तर क्यों है महत्वपूर्ण?

10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड देश भर में क्रेडिट के मूल्य निर्धारण (Pricing of credit) के लिए एक प्रमुख बेंचमार्क है। यदि यह यील्ड 7% के पार निकलती है, तो बाजार के लिए यह संकेत हो सकता है कि आने वाले समय में कर्ज और महंगा रहने वाला है। निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ग्लोबल एनर्जी कीमतों में स्थिरता आएगी और RBI अपनी लिक्विडिटी मैनेजमेंट रणनीति को कैसे आगे बढ़ाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.