1 अक्टूबर 2026 से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट NRI विक्रेताओं से प्रॉपर्टी खरीदने वाले रेजिडेंट्स के लिए नया नियम ला रहा है। अब आपको TAN लेने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन फॉर्म 141 के जरिए ज्यादा जानकारी देना अनिवार्य होगा।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब नॉन-रेजिडेंट्स (NRI) से प्रॉपर्टी खरीदने वाले रेजिडेंट इंडिविजुअल्स और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) के लिए टीडीएस (TDS) प्रक्रिया को आसान बना रहा है। अब तक प्रॉपर्टी खरीदने वाले को TAN (Tax Deduction and Collection Account Number) लेना पड़ता था, जो एक जटिल प्रक्रिया थी। 1 अक्टूबर 2026 से इसकी जगह Form 141 ने ले ली है, जिससे अनुपालन आसान हो जाएगा।
क्या बढ़ेगी आपकी जिम्मेदारी?
भले ही कागजी कार्रवाई आसान हो रही है, लेकिन रिपोर्टिंग में पारदर्शिता की शर्त कड़ी है। विदेशी ट्रांजेक्शन पर नजर रखने के लिए खरीदार को सेलर (विक्रेता) की पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें विदेशी पता, कांटेक्ट डिटेल्स, टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट और यदि पैन (PAN) नहीं है, तो विदेशी टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (TIN) साझा करना अनिवार्य है।
टैक्स के नियम और सावधानियां:
यह समझना जरूरी है कि रिपोर्टिंग का तरीका बदला है, लेकिन टैक्स की दरें नहीं।
- कैपिटल गेन्स: NRI सेलर पर लागू होने वाले कैपिटल गेन्स (सहित सरचार्ज और सेस) के आधार पर ही टीडीएस काटना होगा।
- कोई राहत नहीं: रेजिडेंट्स के लिए मिलने वाली ₹50 लाख की छूट सीमा (Threshold) यहां लागू नहीं होती है।
- फॉर्म 132: टैक्स काटने के महीने के 30 दिन के भीतर खरीदार को सेलर को टीडीएस सर्टिफिकेट (Form 132) जारी करना होगा।
- मल्टीपल बायर्स: अगर एक प्रॉपर्टी के कई खरीदार हैं, तो हर व्यक्ति को अलग से फॉर्म 141 फाइल करना होगा।
बिना उचित दस्तावेजों के टीडीएस काटने पर आपको ऊंचे रेट पर टैक्स का भुगतान करना पड़ सकता है, इसलिए ट्रांजेक्शन से पहले ही सभी दस्तावेज जुटाना आपके लिए फायदेमंद होगा।
