Income Tax की बड़ी कार्रवाई: ₹1.29 लाख करोड़ के संदिग्ध विदेशी रेमिटेंस की जांच शुरू!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Income Tax की बड़ी कार्रवाई: ₹1.29 लाख करोड़ के संदिग्ध विदेशी रेमिटेंस की जांच शुरू!

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने 6,422 कंपनियों के खिलाफ एक बड़ा जांच अभियान शुरू किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने संदिग्ध चैनलों के जरिए विदेश में **₹1.29 लाख करोड़** यानी **$16 बिलियन** भेजे हैं। इस जांच का मुख्य फोकस शेल कंपनियों और उन 36 पेशेवरों पर है जिन्होंने इन ट्रांसफर्स को हरी झंडी दी। यह कदम RBI द्वारा भारतीय रुपये को स्थिर करने के प्रयासों के बीच संभावित कैपिटल फ्लाइट (Capital Flight) को रोकने के लिए उठाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने विदेश में ₹1.29 लाख करोड़, यानी करीब $16 बिलियन की रकम भेजने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। विभाग इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। अभी तक 6,422 ऐसी कंपनियों की पहचान की गई है, जिनमें से 394 पर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कहीं ये ट्रांज़ैक्शन्स कहीं बिज़नेस एक्सपेंस के नाम पर पैसे की हेराफेरी तो नहीं हैं।

Form 15CB का दुरुपयोग?

इस जांच का एक बड़ा केंद्र 'Form 15CB' सर्टिफिकेट हैं, जो विदेश पैसे भेजने के लिए जरूरी होता है। टैक्स डिपार्टमेंट ने 36 ऐसे प्रोफेशनल्स, जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) भी शामिल हैं, की पहचान की है, जिन्होंने कंपनियों की ठीक से जांच किए बिना ही ये सर्टिफिकेट जारी कर दिए। जांचकर्ताओं को शक है कि इन 6,422 कंपनियों में से कई 'शेल कंपनियां' हैं – यानी ऐसी कंपनियां जिनका कोई वास्तविक बिज़नेस या ऑपरेशन नहीं है, और जिन्हें सिर्फ भारत से पैसा बाहर भेजने के लिए बनाया गया था।

कई कंपनियों ने सॉफ्टवेयर, कंसल्टिंग या फ्रेट जैसी सेवाओं के लिए पैसे भेजने का दावा किया। लेकिन, टैक्स अधिकारियों ने पाया कि इन कंपनियों द्वारा भेजी गई रकम उनके वास्तविक टर्नओवर से कहीं ज़्यादा थी। यह बड़ा अंतर मनी लॉन्ड्रिंग या टैक्स चोरी का संकेत हो सकता है।

रुपये पर असर और रेगुलेटरी एक्शन

यह जांच ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय रुपया (Indian Rupee) दबाव में है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी मुद्रा बाज़ार को स्थिर रखने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। बड़े पैमाने पर पूंजी का बाहर जाना, खासकर जब उसका कोई ठोस बिज़नेस कारण न हो, तो यह रुपये को अस्थिर कर सकता है। इन पैसों का पता लगाकर, अधिकारी ऐसे तरीकों के दुरुपयोग को रोकना चाहते हैं, जो रुपये पर दबाव बढ़ा रहे हों।

जांच के दायरे में आई ज़्यादातर रकम सिंगापुर, यूएई, हांगकांग, मॉरीशस और चीन भेजी गई है, जो कुल रेमिटेंस का 72% से ज़्यादा है। इस साल के पहले छह महीनों में भेजी गई रकम पिछले पूरे साल की कुल रकम का 78% तक पहुँच चुकी है, जिसने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के लिए, यह जांच बढ़ते रेगुलेटरी दबाव को दर्शाती है। आने वाले महीनों में, कंपनियों को बाहर पैसे भेजने के लिए सख्त अनुपालन और ज़्यादा डॉक्यूमेंटेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। कंसल्टिंग, आईटी और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को ऑडिट के दौरान अपने ट्रांज़ैक्शन्स की प्रामाणिकता साबित करने के लिए ज़्यादा जांच का सामना करना पड़ सकता है। इस मामले का अंतिम नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि टैक्स डिपार्टमेंट इन पैसों के असली लाभार्थियों का पता लगा पाता है या नहीं, और इसके बाद विदेशी मुद्रा ट्रांज़ैक्शन्स में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए क्या नई नीतियां आती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.