Income Tax Department ने उन क्रिप्टो निवेशकों को ऑटोमेटेड नोटिस भेजने शुरू किए हैं जिनके एक्सचेंज रिकॉर्ड और ITR फाइलिंग में अंतर है। निवेशकों को अपने ट्रांजैक्शन को AIS से मिलान करना चाहिए और जुर्माना बचाने के लिए समय पर जवाब देना चाहिए।
भारत में क्रिप्टो निवेशकों को आयकर विभाग से ऑटोमेटेड नोटिस मिल रहे हैं। ये नोटिस तब आते हैं जब विभाग का डिजिटल सिस्टम निवेशक द्वारा फाइल किए गए ITR और अन्य वित्तीय स्रोतों से प्राप्त डेटा में अंतर पकड़ता है।
नोटिस क्यों मिल रहे हैं?
इसका मुख्य कारण डेटा का ऑटोमेटेड क्रॉस-वेरिफिकेशन है। आयकर विभाग अब Annual Information Statement (AIS), Form 26AS और क्रिप्टो एक्सचेंजों से मिले TDS रिकॉर्ड का उपयोग कर रहा है। जब एक्सचेंज पर दिखाई गई कुल ट्रेडिंग गतिविधि ITR में दर्ज आय से मेल नहीं खाती, तो सिस्टम अकाउंट को समीक्षा के लिए चिह्नित कर देता है। यह कोई टैक्स चोरी का स्वतः प्रमाण नहीं है, बल्कि अक्सर रिपोर्टिंग में गलती के कारण होता है। 'Schedule VDA' सेक्शन में पूरी जानकारी न देने से भी यह समस्या हो सकती है।
टैक्स कानून का असर
भारत में Virtual Digital Assets (VDA) से होने वाली कमाई पर 30% फ्लैट टैक्स और 1% TDS (धारा 194S के तहत) लागू है। TDS कटने के कारण विभाग के पास आपकी खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड होता है। यदि यह रिकॉर्ड आपकी फाइलिंग से मेल नहीं खाता, तो स्पष्टीकरण के लिए नोटिस जारी किया जाता है।
जवाब कैसे दें?
नोटिस मिलते ही तय समयसीमा में जवाब देना अनिवार्य है। आयकर पोर्टल पर जाकर सेक्शन 143(1) या 142(1) के तहत कारण देखें। इसके बाद, एक्सचेंज से प्राप्त ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और TDS सर्टिफिकेट का अपने ITR डेटा से मिलान करें। गलती मिलने पर रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करना पड़ सकता है।
अनदेखी करने के जोखिम
नोटिस को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यदि आप जवाब नहीं देते हैं, तो विभाग धारा 144 के तहत 'बेस्ट-जजमेंट असेसमेंट' कर सकता है, जिससे टैक्स डिमांड बढ़ सकती है। इसके अलावा, धारा 270A के तहत गलत रिपोर्टिंग के मामले में 200% तक की पेनल्टी लग सकती है।
