आयकर विभाग ने ₹8,500 करोड़ की संदिग्ध प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शंस की जांच शुरू की है। विभाग अब डेटा एनालिटिक्स के जरिए पैन (PAN) और प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के डेटा का मिलान कर रहा है, जिससे बेनामी संपत्ति और टैक्स चोरी करने वालों पर बड़ी कार्रवाई तय है।
आयकर विभाग ने रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए अब अपना पूरा जोर टेक्नोलॉजी पर लगा दिया है। विभाग ने ₹8,500 करोड़ की उन प्रॉपर्टी डील्स को रडार पर लिया है, जहां खरीद के आंकड़ों और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के बीच भारी अंतर पाया गया है।
डेटा से हो रहा है 'खुलासा'
अब फिजिकल इंस्पेक्शन के बजाय, विभाग एडवांस डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहा है। विभाग मुख्य रूप से PAN डेटा को प्रॉपर्टी रजिस्ट्री रिकॉर्ड्स के साथ मिला रहा है। इसमें पिछले 2 फाइनेंशियल ईयर में खरीदी गई बड़ी जमीन, फार्महाउस और एग्रीकल्चरल होल्डिंग्स की बारीकी से जांच हो रही है।
बेनामी ट्रांजैक्शंस का जाल
इस पूरी जांच में करीब ₹2,000 करोड़ के संदिग्ध बेनामी ट्रांजैक्शंस सामने आए हैं। विभाग उन लोगों की फाइनेंशियल हिस्ट्री खंगाल रहा है जिनके नाम पर प्रॉपर्टी तो है, लेकिन उनकी आय के स्रोत उस बड़े निवेश से मेल नहीं खाते। ऐसे लोगों को विभाग की तरफ से नोटिस भेजा जा रहा है, जिसमें उनसे फंड के सोर्स का सबूत मांगा गया है।
'NUDGE' कैंपेन का असर
यह कार्रवाई सरकार के 'NUDGE' कैंपेन का हिस्सा है, जिसने पहले भी विदेशी संपत्तियों का पता लगाने में मदद की थी। बैंक, पोस्ट ऑफिस और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रार से मिल रहे डेटा फीड्स ने टैक्स चोरी करने वालों के लिए रास्ता लगभग बंद कर दिया है।
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे बाजार में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी, भले ही कैश में होने वाले ट्रांजैक्शंस पर शॉर्ट टर्म दबाव देखने को मिले। टैक्सपेयर्स को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपने रिकॉर्ड्स को दुरुस्त कर लें, वरना विभाग आगे सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
