ITAT Delhi ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिसके मुताबिक अगर आपने ओरिजिनल डेडलाइन पर रिटर्न फाइल नहीं किया था, तब भी आप सेक्शन 148 के रीअसेसमेंट नोटिस के जवाब में रिफंड का दावा कर सकते हैं।
टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देते हुए ITAT दिल्ली ने साफ किया है कि अगर किसी ने तय समय सीमा के भीतर अपना ओरिजिनल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया था, तब भी वह सेक्शन 148 के तहत मिले नोटिस के जवाब में रिफंड क्लेम कर सकता है।\n\n### क्या था पूरा मामला?\nयह विवाद तब शुरू हुआ जब टैक्स अधिकारियों ने ₹5.31 लाख का रिफंड क्लेम यह कहकर खारिज कर दिया कि टैक्सपेयर ने सेक्शन 139 के तहत ओरिजिनल रिटर्न नहीं भरा था। अधिकारियों का तर्क था कि सेक्शन 148 केवल 'एस्केप्ड इनकम' (छूटी हुई आय) को रिकवर करने के लिए है, न कि टैक्सपेयर के लिए रिफंड मांगने का जरिया।\n\n### ट्रिब्यूनल की दलील\nITAT दिल्ली की बेंच ने इस संकीर्ण सोच को खारिज करते हुए कहा कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा 237 के तहत टैक्सपेयर का यह मौलिक अधिकार है कि अगर कलेक्ट किया गया टैक्स उसकी वास्तविक लायबिलिटी से ज्यादा है, तो उसे रिफंड मिलना ही चाहिए। इस मामले में, रीअसेसमेंट के बाद टैक्सपेयर की इनकम 'निल' (Nil) पाई गई क्योंकि उसने बिजनेस लॉस साबित कर दिया था।\n\n### संविधान का हवाला\nट्रिब्यूनल ने संविधान के अनुच्छेद 265 का जिक्र करते हुए कहा कि कानून के अधिकार के बिना कोई भी टैक्स न तो लगाया जा सकता है और न ही वसूला जा सकता है। अगर रीअसेसमेंट में यह साबित होता है कि सरकार के पास टैक्सपेयर का पैसा ज्यादा जमा है, तो उसे वापस करना कानूनी बाध्यता है।\n\n### ध्यान रखें\nयह फैसला उन लोगों के लिए एक सुरक्षा कवच है जो रीअसेसमेंट प्रक्रिया से गुजर रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि ओरिजिनल रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन का महत्व कम हो गया है। सेक्शन 139 के तहत समय पर रिटर्न भरना अब भी अनिवार्य है। यह रूलिंग केवल तकनीकी कारणों से रिफंड अटकने वाले मामलों में राहत का रास्ता खोलती है।
