IT सेक्टर पर AI का साया, निवेशकों में घबराहट
बुधवार को भारतीय शेयर बाज़ारों की शुरुआत थोड़ी धीमी रही, जो ग्लोबल मार्केट के मिले-जुले संकेतों को दर्शाता है। गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) फ्यूचर्स में मामूली गिरावट देखी गई। हालांकि, तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे आम तौर पर उम्मीद से बेहतर आए हैं और भारतीय इक्विटी के लिए एक पॉजिटिव आउटलुक दे रहे हैं, लेकिन IT सेक्टर में भारी गिरावट एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है। निफ्टी IT इंडेक्स में 4 फरवरी को अकेले 6% से ज़्यादा की भारी गिरावट आई और फरवरी के मध्य तक यह इंडेक्स लगभग 10 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस जबरदस्त बिकवाली ने भारत की बड़ी IT कंपनियों के मार्केट कैप से अनुमानित $50 बिलियन का सफाया कर दिया। TCS, Infosys और Wipro जैसी दिग्गज कंपनियों में आई भारी गिरावट, अन्य सेक्टर्स की पॉजिटिव खबरों और मजबूत कॉरपोरेट कमाई पर भारी पड़ रही है।
कमाई के शानदार नंबर, पर IT सेक्टर पर सवाल
IT सेक्टर की हालत और बाकी मार्केट के परफॉरमेंस के बीच का अंतर साफ नजर आता है। BSE-500 इंडेक्स ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही में पिछले साल की तुलना में 16% का शानदार प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ग्रोथ दर्ज किया, जो कि निफ्टी 50 के 8% ग्रोथ से काफी बेहतर है। खासकर कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में यह मजबूती देखी गई। एमके ग्लोबल रिसर्च (Emkay Global Research) जैसी कुछ ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि निफ्टी दिसंबर 2026 तक 29,000 के स्तर तक जा सकता है। हाल ही में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% से घटाकर लगभग 18% कर दिया है, जिससे टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और केमिकल जैसे सेक्टर्स की एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ने की उम्मीद है। इन सबके बावजूद, AI के कारण IT सेक्टर में आई उथल-पुथल, जिसमें TCS जैसी कंपनियां अपने ऑल-टाइम हाई से 44% तक गिर चुकी हैं, एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है। मार्केट अब दो हिस्सों में बंटता दिख रहा है, जहां एक तरफ टेक्नोलॉजी स्टॉक्स स्ट्रक्चरल बदलावों का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दूसरे सेक्टर्स डोमेस्टिक ग्रोथ ड्राइवर्स का फायदा उठा रहे हैं।
वैल्यूएशन पर असर और सेक्टरों में असमानता
फिलहाल मार्केट में सेक्टरों के बीच काफी असमानता देखने को मिल रही है। जहां BSE-500 ने 3QFY26 में 16% का मजबूत PAT ग्रोथ दिखाया, वहीं निफ्टी IT इंडेक्स फरवरी 2026 के मध्य तक सिर्फ आठ ट्रेडिंग सेशन में लगभग 19% गिर गया। एडवांस AI टूल्स के कारण IT सेवाओं की डिमांड में बड़ा बदलाव आ रहा है, जो कि सीधे तौर पर बड़ी IT कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल को चुनौती दे रहा है। 2025 में फॉरेन इन्वेस्टर्स ने भारतीय IT स्टॉक्स से लगभग $8.5 बिलियन की बिकवाली की, जिससे दबाव और बढ़ गया। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है, कुछ का मानना है कि बिकवाली जरूरत से ज्यादा हुई है, जबकि कुछ AI से होने वाले रेवेन्यू लॉस और मार्जिन पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं। निफ्टी 50 इंडेक्स फिलहाल अपने लॉन्ग-पीरियड एवरेज से थोड़ा नीचे 22.24 के फॉरवर्ड P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो एक रीजनेबल वैल्यूएशन का संकेत देता है। हालांकि, IT सेक्टर के वैल्यूएशन पर अब सवाल उठ रहे हैं, जहां Wipro का P/E 17-19x और Infosys व TCS का P/E 20-27x के बीच है। व्हाइटओक कैपिटल मार्केट वैल्यूएशन इंडेक्स (WhiteOak Capital Market Valuation Index) का जनवरी 2026 में 99 पर आना (दिसंबर 2025 में 100.5 था) इक्विटी में निवेश के लिए एक बेहतर मौका हो सकता है। व्हाइटओक कैपिटल बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (WhiteOak Capital Balanced Advantage Fund) ने भी अपनी इक्विटी एलोकेशन को बढ़ाकर 65.89% कर दिया है, जो कि मार्केट में सतर्कता के साथ अवसरों को भुनाने की रणनीति दिखाता है।
AI के कारण IT सेक्टर के लिए बड़े खतरे
भारतीय IT स्टॉक्स में आई यह भारी गिरावट एक क्रिटिकल मोड़ साबित हो सकती है, जो AI-केंद्रित भविष्य में इस सेक्टर की लंबी अवधि की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े कर रही है। इस बियर केस का मुख्य कारण यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक IT सर्विसेज बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से बदल सकता है। AI टूल्स, जो जटिल वर्कफ्लो, कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू और कंप्लायंस मैनेजमेंट जैसे कामों को ऑटोमेट कर सकते हैं, वे TCS और Infosys जैसी कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर 'सीट कंप्रेशन' (कम लोगों की जरूरत) का कारण बन सकते हैं। AI प्रोडक्टिविटी टूल्स के नए रूप, जैसे Anthropic का Claude 4.6, भविष्य में डिमांड पैटर्न को बदल सकते हैं, खासकर IT इंडस्ट्री के लेबर-इंटेंसिव सेगमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। 2025 में फॉरेन इन्वेस्टर्स की IT स्टॉक्स से हुई भारी बिकवाली इसी जोखिम का संकेत है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनियां AI इंटीग्रेशन और कंसल्टिंग सर्विसेज देकर अनुकूलन कर सकती हैं, लेकिन स्ट्रक्चरल हेडविंड्स को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। IT इंडेक्स में सिर्फ आठ ट्रेडिंग सेशन में 19% की गिरावट इन्वेस्टर की उस घबराहट को दिखाती है कि यह सेक्टर AI-प्रेरित व्यवधानों से कैसे निपटेगा, जिससे रेवेन्यू लॉस और मार्जिन में कमी आ सकती है।
आगे का रास्ता: सतर्कता के साथ उम्मीद
IT सेक्टर की मुश्किलों के बावजूद, भारतीय इक्विटी का समग्र आउटलुक अभी भी सतर्कता के साथ पॉजिटिव बना हुआ है। Q3 की मजबूत कमाई और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के सकारात्मक असर से यह उम्मीद बंधी है। एमके ग्लोबल रिसर्च (Emkay Global Research) का अनुमान है कि निफ्टी दिसंबर 2026 तक 29,000 तक पहुंच सकता है, जिसमें SMID लेंडर्स, न्यू-एज इंटरनेट कंपनियां और डिस्क्रिशनरी कंजम्पशन थीम पर फोकस रहेगा। मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) के अनुसार, निफ्टी की कमाई FY25–27E में लगभग 12% कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने की उम्मीद है। व्हाइटओक कैपिटल बैलेंस्ड एडवांटेज फंड द्वारा इक्विटी में बढ़ाई गई एलोकेशन रणनीतिक प्ले का संकेत देती है। ऐसे में, यह साफ है कि भले ही IT सेक्टर में बड़ी चुनौतियां हों, लेकिन बाकी मार्केट में अच्छे अवसर मौजूद हैं। निवेशकों को IT कंपनियों के मैनेजमेंट से AI एडॉप्शन, डील पाइपलाइन की क्वालिटी और मार्जिन ट्रेंड्स पर कमेंट्री पर करीब से नजर रखनी होगी, क्योंकि यही चीजें IT सेक्टर के भविष्य की दिशा तय करेंगी।
