INDIA ब्लॉक ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर Gyanesh Kumar को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक कलह को आधार बनाकर लाया जा रहा यह कदम राजनीतिक अस्थिरता का संकेत दे सकता है, जिस पर बाजार की नजरें टिकी हैं।
INDIA गठबंधन के नेता नई दिल्ली में एक अहम बैठक कर रहे हैं, जिसका मुख्य एजेंडा चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) Gyanesh Kumar के खिलाफ औपचारिक प्रस्ताव लाना है। यह सियासी कदम चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच प्रशासनिक निर्देशों को लेकर चल रहे कथित मतभेदों के बाद उठाया गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि वे इस कदम के जरिए संस्थान में पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहते हैं।
चुनाव आयोग का पक्ष
वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोग का कहना है कि संस्थान के भीतर होने वाली चर्चाएं एक ऑटोनॉमस प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उनके सभी प्रशासनिक निर्देश मौजूदा नियमों के दायरे में हैं। इसके बावजूद, विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे को उठाने की योजना बना रहा है, साथ ही देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।
बाजार पर असर और गठबंधन के भीतर तनाव
निवेशकों के लिए किसी भी बड़े संवैधानिक संस्थान में जारी खींचतान चिंता का विषय हो सकती है, क्योंकि यह गवर्नेंस स्टेबिलिटी पर सीधा असर डालती है। राजनीतिक अनिश्चितता का असर अक्सर शॉर्ट-टर्म मार्केट वोलैटिलिटी के रूप में दिखता है।
खास बात यह है कि INDIA ब्लॉक की एकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। Aam Aadmi Party और Dravida Munnetra Kazhagam जैसे प्रमुख सहयोगी दलों ने इस रणनीति बैठक से दूरी बनाकर अपने मतभेद जाहिर कर दिए हैं। वहीं, Samajwadi Party भी इस पूरी कवायद में थोड़ी सतर्कता बरतती नजर आ रही है। अब सबकी निगाहें संसद के आगामी सत्र पर हैं कि सरकार और चुनाव आयोग इस राजनीतिक दबाव का सामना कैसे करते हैं।
