IMF ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर **3.1%** कर दिया है, लेकिन साथ ही AI सेक्टर में बबल, मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ते सरकारी कर्ज को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है।
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने अपनी हालिया 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट में साल 2026 के लिए एक मिली-जुली तस्वीर पेश की है। हालांकि वैश्विक विकास दर का अनुमान 3.1% तक बढ़ा दिया गया है, लेकिन संस्था ने तीन बड़े जोखिमों को रेखांकित किया है जो बाजार की चाल बिगाड़ सकते हैं।
क्या AI में है बड़ा बुलबुला (AI Bubble)?
बीते एक साल से AI सेक्टर में भारी निवेश हुआ है, जो ग्लोबल ग्रोथ का इंजन बना हुआ है। IMF का कहना है कि यह वैल्यूएशन असल उत्पादकता (Productivity) से ज्यादा 'हाइप' पर टिका है। यदि कंपनियां इन मॉडल्स से ठोस मुनाफा नहीं कमा पाईं, तो बाजार में बड़ी गिरावट आ सकती है। IMF के मुताबिक, अगर AI निवेश का यह माहौल बिगड़ता है, तो 2028 तक ग्लोबल जीडीपी में 1.1% की गिरावट आ सकती है, जबकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.8% का बड़ा नुकसान हो सकता है।
जियोपॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की चिंता
मिडिल ईस्ट का संघर्ष ग्लोबल ट्रेड के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यदि तनाव और बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें $130 प्रति बैरल के पार निकलती हैं, तो वैश्विक आर्थिक विकास में 0.5% की कमी आ सकती है। भारत जैसे देशों के लिए, जो कच्चे तेल के बड़े आयातक हैं, यह स्थिति महंगाई और ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को और चुनौतीपूर्ण बना देगी।
बढ़ता सरकारी कर्ज
IMF ने यह भी कहा है कि दुनिया भर में बढ़ते कर्ज के कारण बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) ऊंचे बने हुए हैं। सरकारें अपना बड़ा बजट कर्ज का ब्याज चुकाने में ही खर्च कर रही हैं, जिससे विकास कार्यों के लिए फंड कम पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए जरूरी संकेत
निवेशकों को अब कंपनियों की बैलेंस शीट के साथ-साथ ग्लोबल संकेतों पर भी नजर रखनी होगी। इसमें मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतें, सॉवरेन बॉन्ड यील्ड्स और AI कंपनियों की असली प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
