IMF ने साल 2027 तक ग्लोबल इकोनॉमी में **3.4%** की ग्रोथ का अनुमान जताया है। हालांकि, बढ़ती सरकारी कर्ज और जिद्दी महंगाई के बीच भारतीय निवेशकों के लिए ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और FII फ्लो पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की नई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2027 तक ग्लोबल इकोनॉमी 3.4% की दर से आगे बढ़ेगी। यह आंकड़ा भले ही अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को दिखाता है, लेकिन IMF ने बढ़ते सरकारी कर्ज और बेकाबू महंगाई को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। भारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजी में बदलाव का संकेत हो सकती है।
महंगाई और RBI का रुख
IMF ने स्पष्ट किया है कि भारत समेत कई देशों में महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंकों के लक्ष्य से ऊपर है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। जब महंगाई कम नहीं होती, तो Reserve Bank of India (RBI) पर ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने का दबाव बना रहता है। कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने का मतलब है—उनका इंटरेस्ट बर्डन बढ़ना, जो सीधे तौर पर प्रॉफिट मार्जिन पर चोट करता है।
ग्लोबल मार्केट की उथल-पुथल का असर
रिपोर्ट में फ्रांस जैसे बड़े देशों में बॉन्ड मार्केट की गिरावट का जिक्र है, जो सरकारी खर्च को लेकर निवेशकों की चिंता दर्शाता है। ग्लोबल मार्केट आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स से FII (Foreign Institutional Investor) का पैसा बाहर निकल सकता है। इसका सीधा असर स्टॉक मार्केट की लिक्विडिटी पर पड़ता है।
आने वाले समय में सरकारों के लिए आर्थिक स्थिरता और कर्ज प्रबंधन के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी। भारतीय बाजार में अब निवेशकों को RBI की पॉलिसी मीटिंग, घरेलू महंगाई के आंकड़े और सरकारी फिस्कल डेफिसिट पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
