IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने ग्लोबल इकोनॉमी के लिए 'ट्रिपल व्हैमी' यानी तीन बड़े खतरों की चेतावनी दी है। इसमें तेजी से बढ़ता AI निवेश, रिकॉर्ड-तोड़ कर्ज और लगातार जारी जियोपॉलिटिकल संघर्ष शामिल हैं, जो महंगाई बढ़ा सकते हैं।
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने ग्लोबल इकोनॉमी की सेहत को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सिंगापुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उन तीन बड़े इंटरकनेक्टेड खतरों का जिक्र किया, जिनसे दुनिया को तुरंत निपटने की जरूरत है। ये खतरे हैं—अनियंत्रित AI निवेश का बूम, दुनिया भर में बढ़ता कर्ज का बोझ और मिडिल ईस्ट व यूक्रेन में चल रहे तनाव।
AI का विरोधाभास और महंगाई
भले ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हालिया शेयर बाजार में तेजी और कैपिटल इन्वेस्टमेंट में मुख्य भूमिका निभाई है, लेकिन जॉर्जीवा ने आगाह किया कि इसके साथ बड़े खतरे भी जुड़े हैं। डेटा सेंटर के लिए जिस तरह से भारी इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है, वह ऊर्जा और संसाधनों की डिमांड बढ़ा रहा है, जिससे महंगाई (Inflation) का दबाव बढ़ रहा है।
IMF का मानना है कि AI के फायदे दुनिया भर में समान रूप से नहीं बंट रहे हैं। निवेशकों के लिए असली चिंता यह है कि अगर AI से मिलने वाली प्रोडक्टिविटी का फायदा कंपनियों को नहीं मिला, तो बाजार में बड़ी गिरावट (Market Correction) आ सकती है। फिलहाल टेक स्टॉक्स का वैल्यूएशन काफी ज्यादा है, जो इसे और जोखिम भरा बनाता है।
कर्ज का जाल और वित्तीय स्थिरता
टेक्नोलॉजी सेक्टर के अलावा, IMF ने ग्लोबल डेट यानी कर्ज की स्थिति को भी खतरनाक बताया है। ग्लोबल डेट-टू-जीडीपी (Debt-to-GDP) का स्तर 100% को पार कर चुका है। हाई इंटरेस्ट रेट्स के कारण सरकारों के पास अब ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने के लिए 'फिस्कल स्पेस' काफी कम बचा है।
वहीं, जियोपॉलिटिकल तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आसपास मंडरा रही हैं। भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए यह ग्रोथ पर सीधे टैक्स जैसा है, जिससे महंगाई को काबू में रखना सेंट्रल बैंकों के लिए और मुश्किल हो जाता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
IMF ने सरकारों से फिस्कल डिसिप्लिन अपनाने की अपील की है। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अगर एनर्जी की बढ़ती कीमतों और AI की धीमी ग्रोथ से कंपनियों का मार्जिन प्रभावित होता है, तो स्टॉक्स पर दबाव आ सकता है। अक्टूबर में बैंकॉक में होने वाली IMF-वर्ल्ड बैंक की सालाना मीटिंग में इस पर और स्पष्ट तस्वीर उभरने की उम्मीद है।
