IMF का बड़ा दावा: AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च से ग्लोबल ग्रोथ को मिला सहारा

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AuthorNeha Patil|Published at:
IMF का बड़ा दावा: AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च से ग्लोबल ग्रोथ को मिला सहारा

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के मुताबिक, AI इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहा भारी निवेश ग्लोबल इकोनॉमी को **3%** की ग्रोथ दर पर बनाए रखने में मदद कर रहा है। यह निवेश ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं के खिलाफ एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है।

AI का 'डिफेंसिव' रोल

बैंकॉक में आयोजित IMF-वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक में मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने साफ किया कि AI की ओर बहता हुआ पूंजी का प्रवाह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी साबित हो रहा है। जहां एक तरफ भू-राजनीतिक तनावों के चलते ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और औद्योगिक उत्पादन पर दबाव बना है, वहीं दूसरी ओर AI के प्रति बढ़ते रुझान ने इकोनॉमी को गिरने से बचा लिया है।

अनुमान है कि इससे विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ में 0.5% से 1.0% तक का इजाफा होगा, जबकि हार्डवेयर एक्सपोर्ट करने वाले एशियाई देशों को 0.2% से 0.8% तक का सीधा फायदा मिल सकता है। थाईलैंड जैसे देशों के लिए यह अपनी औद्योगिक क्षमता बढ़ाने का एक बड़ा मौका है।

बढ़ते जोखिम और निवेशकों के लिए अलर्ट

हालांकि, इस चमकती तस्वीर के पीछे गहरे जोखिम भी छिपे हैं। IMF की चेतावनी है कि यह तेजी मुख्य रूप से बड़ी टेक कंपनियों, जिन्हें 'हाइपरस्केलर्स' कहा जाता है, द्वारा कर्ज लेकर किए गए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर टिकी है।

निवेशकों को इन 3 बातों पर नजर रखनी चाहिए:

  • कर्ज का बोझ: अगर इन कंपनियों की अर्निंग्स उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं, तो यह भारी-भरकम कर्ज बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
  • इक्विटी कंसंट्रेशन: बाजार का पूरा ध्यान चंद बड़ी हार्डवेयर कंपनियों पर सिमट गया है, जिससे जोखिम बढ़ गया है।
  • प्रोडक्टिविटी का सवाल: लॉन्ग टर्म में यह तभी फायदेमंद होगा जब यह इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए असल मुनाफे और कार्यक्षमता (Efficiency) में तब्दील हो।

आने वाले कुछ फाइनेंशियल क्वार्टर्स में कंपनियों के नतीजे यह तय करेंगे कि AI का यह 'गोल्ड रश' टिकाऊ है या महज एक बुलबुला।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.