रेटिंग एजेंसी ICRA ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष **2027** की चौथी तिमाही में राज्य सरकारें **₹4.8 लाख करोड़** से लेकर **₹5.4 लाख करोड़** तक बाजार से जुटाएंगी। यह भारी-भरकम कर्ज बॉन्ड मार्केट की दिशा और देश की ब्याज दरों पर बड़ा असर डाल सकता है।
रेटिंग एजेंसी ICRA के ताजा अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) में राज्य सरकारें सिक्योरिटीज बेचकर ₹4.8 लाख करोड़ से ₹5.4 लाख करोड़ के बीच फंड जुटा सकती हैं। यह कर्ज राज्य अपनी विकास परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बाजार से ले रहे हैं। साल भर का कुल लक्ष्य ₹13.4 लाख करोड़ से ₹14 लाख करोड़ के बीच रखा गया है।
बॉन्ड मार्केट पर असर
निवेशकों के लिए सरकारी उधारी के आंकड़े बेहद अहम हैं। जब राज्य बड़ी मात्रा में कर्ज लेते हैं, तो मार्केट में बॉन्ड की सप्लाई बढ़ जाती है। यदि बैंकों, म्यूचुअल फंड्स और इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से वैसी डिमांड नहीं आई, तो बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) में उछाल आ सकता है। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का सीधा असर ब्याज दरों पर पड़ता है, जिससे न केवल कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होता है, बल्कि आम आदमी की EMI पर भी दबाव बन सकता है।
'बेंचमार्क इश्यूअंस' से मिलेगी राहत?
मार्केट पर पड़ने वाले इस बोझ को कम करने के लिए 'बेंचमार्क इश्यूअंस स्ट्रेटजी' (Benchmark Issuance Strategy) को अपनाया गया है, जिससे उधारी का कैलेंडर पहले से तय रहता है। अक्टूबर 2026 तक 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे अपनाया है, जिससे निवेशकों के लिए सरप्राइज कम हुए हैं और मार्केट में लिक्विडिटी बनी हुई है।
तीसरी तिमाही की स्थिति और चुनौतियां
तीसरी तिमाही में राज्यों ने ₹3.6 लाख करोड़ जुटाए थे, जो पिछले साल के मुकाबले 25.9% ज्यादा थे। इसमें महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा जैसे राज्यों की हिस्सेदारी प्रमुख रही। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर राज्य अपने तय कैलेंडर से भटकते हैं या वित्तीय साल के अंत में अचानक बहुत ज्यादा कर्ज उठाते हैं, तो बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी का संकट पैदा हो सकता है। निवेशक अब साप्ताहिक नीलामी (Weekly Auction) के नतीजों पर नजर गड़ाए हुए हैं।
