दुनिया के सामने अब एक नया खतरा 'Hyper El Niño' के रूप में खड़ा है। अनुमान है कि अगले 5 सालों में यह ग्लोबल GDP को **$7.2 ट्रिलियन** का नुकसान पहुँचा सकता है। भारत के लिए यह कृषि उपज और महंगाई के लिहाज से बड़ा रिस्क है।
दुनिया भर के पॉलिसी मेकर्स के लिए 'Hyper El Niño' बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान 1950 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर है। आर्थिक मॉडल्स की मानें तो सिर्फ 2027 में ही ग्लोबल GDP को $1 ट्रिलियन का नुकसान हो सकता है। यदि सही समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंकड़ा $7.2 ट्रिलियन तक पहुँच सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भले ही भारत की GDP ग्रोथ फिलहाल 7% के आसपास स्थिर बनी हुई है, लेकिन इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने इस घटना को एक बड़ा रिस्क माना है। El Niño का सीधा असर मानसून पर पड़ता है। बारिश अनियमित होने से चावल, चीनी और दालों जैसी जरूरी फसलों की पैदावार गिर सकती है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू सकते हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
बाजार की नजर अब ग्रामीण खपत (Rural Demand) पर है। अगर खेती से होने वाली कमाई घटी, तो FMCG कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, बढ़ती फूड महंगाई के चलते Reserve Bank of India (RBI) के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। केंद्रीय बैंक को महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सतर्क रुख अपनाना पड़ सकता है।
साथ ही, पाम ऑयल और चीनी जैसी कमोडिटीज की सप्लाई चेन पर भी ग्लोबल तनाव बना हुआ है। एशियाई देशों में सप्लाई घटने से भारत के इंपोर्ट बिल और ट्रेड बैलेंस पर बुरा असर पड़ सकता है। आने वाले समय में घरेलू फसल की रिपोर्ट और सरकार द्वारा फूड सिक्योरिटी के कदमों पर बाजार की पूरी नजर रहेगी।
