हिमाचल प्रदेश ने केंद्र सरकार पर Ayushman Bharat योजना के तहत **₹112 करोड़** का फंड न देने का आरोप लगाया है। इस देरी के कारण राज्य की कई जरूरी हेल्थ परियोजनाएं ठप पड़ गई हैं और सरकार को अपने खजाने से **₹203 करोड़** खर्च करने पड़े हैं।
हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने Ayushman Bharat-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत बकाया ₹112 करोड़ के भुगतान को लेकर मोर्चा खोल दिया है। राज्य सरकार का दावा है कि 2021 से 2026 के बीच फंड में आई इस कमी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को मुश्किल बना दिया है।
प्रोजेक्ट्स पर गहरा असर
इस स्कीम के तहत खर्चों का बंटवारा 90:10 के अनुपात में होता है, जहां केंद्र सरकार को बड़ा हिस्सा देना होता है। समय पर सेंट्रल ग्रांट न मिलने से राज्य में मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम रुक गया है। इनमें 9 क्रिटिकल केयर ब्लॉक और 12 डिस्ट्रिक्ट-लेवल पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरीज शामिल हैं, जिनसे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होना था।
राज्य के खजाने पर भारी दबाव
राज्य प्रशासन के अनुसार, 2023 से अब तक लगभग 2.85 लाख मरीजों के इलाज को जारी रखने के लिए सरकार ने अपनी जेब से ₹203 करोड़ से अधिक खर्च किए हैं। यह अनिवार्य 10% योगदान से कहीं ज्यादा है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ गया है।
पुराना विवाद और जांच का साया
यह फंडिंग विवाद ऐसे समय में आया है जब राज्य में पहले से ही प्रशासनिक सख्ती चल रही है। साल 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य में इस स्कीम के कार्यान्वयन में वित्तीय गड़बड़ी और दस्तावेजों की कमी के आरोपों की जांच की थी। इन पुरानी विसंगतियों के कारण अब केंद्र से बकाया भुगतान हासिल करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब निवेशकों और आम जनता की नजर इस बात पर है कि केंद्र और राज्य के बीच यह वित्तीय गतिरोध कब और कैसे सुलझता है।
