Himachal Pradesh सरकार ने पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नई औद्योगिक परियोजनाओं के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है। सरकार ने अब उन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है जिनमें पानी और बिजली की खपत बहुत ज्यादा होती है, जैसे कि इथेनॉल प्लांट।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी औद्योगिक नीति में बड़ा बदलाव करते हुए पारिस्थितिक स्थिरता (Ecological Stability) को औद्योगिक विस्तार से ऊपर रखा है। राज्य के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया है कि अब उन नई परियोजनाओं को मंजूरी नहीं दी जाएगी जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं या जिनमें पानी और बिजली का बहुत अधिक उपयोग होता है। यह नीति विशेष रूप से इथेनॉल निर्माण और कुछ स्टील रीइन्फोर्समेंट बार यूनिट्स को प्रभावित करेगी।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
राज्य में व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए अब नियामक माहौल (Regulatory Landscape) पूरी तरह बदल गया है। जो प्रोजेक्ट रोजाना लाखों लीटर पानी की खपत करते हैं, उन्हें अब कड़ी जांच के दायरे में रखा गया है। सरकार का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में सीमित प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना है।
Nalagarh प्लांट पर कार्रवाई
सरकार केवल नई परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा इकाइयों पर भी कड़ी नजर रख रही है। नालागढ़ स्थित Shivalik Solid Waste Management प्लांट को लेकर स्थानीय निवासियों की शिकायतों के बाद, सरकार ने एक संयुक्त समिति का गठन किया है। इसमें डिप्टी कमिश्नर और स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी शामिल हैं। यह समिति प्लांट के कामकाज का ऑन-साइट ऑडिट करेगी और इसके स्थानांतरण की संभावनाओं पर भी विचार करेगी।
भविष्य का रास्ता
इस बदलाव के बाद कंपनियों के लिए अनुपालन लागत (Compliance Cost) बढ़ने की संभावना है। भविष्य में हिमाचल में वही उद्योग फल-फूल पाएंगे जो ग्रीन एनर्जी और कम संसाधन खपत वाली तकनीकों का उपयोग करेंगे। निवेशकों को अब अपने रिसोर्स कंजम्पशन मॉडल को राज्य की नई आवश्यकताओं के अनुसार फिर से तैयार करना होगा।
