High-Speed Rail: एविएशन सेक्टर के लिए बड़ी मुसीबत, ₹16 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट से उड़ेगी एयरलाइन्स की नींद

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
High-Speed Rail: एविएशन सेक्टर के लिए बड़ी मुसीबत, ₹16 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट से उड़ेगी एयरलाइन्स की नींद

भारत में ₹16 लाख करोड़ की लागत से बनने वाले सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर एविएशन सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाले हैं। मुंबई-पुणे जैसे प्रमुख रूटों पर रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से शॉर्ट-हॉल फ्लाइट्स की डिमांड कम होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे एयरलाइन्स को अपना बिजनेस मॉडल बदलने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

भारत में घरेलू सफर का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। सरकार ने सात हाई-स्पीड रेल (HSR) कॉरिडोर के लिए ₹16 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, मुंबई-पुणे, हैदराबाद-बेंगलुरु और दिल्ली-वाराणसी जैसे रूटों को जोड़ने का मकसद शॉर्ट-हॉल फ्लाइट्स को रिडंडेंट यानी गैर-जरूरी बनाना है।

एविएशन इंडस्ट्री का बिगड़ा गणित

यह बदलाव एविएशन सेक्टर के लिए ऐसे समय में आया है जब वह पहले से ही दबाव में है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने एविएशन सेक्टर के लिए 'नेगेटिव' आउटलुक बरकरार रखा है। जुलाई 2026 में घरेलू एयर पैसेंजर ट्रैफिक में साल-दर-साल 4.8% की गिरावट दर्ज की गई है। एयरलाइन्स पहले ही महंगे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) और डॉलर में पेमेंट के कारण बढ़ते लीज और मेंटेनेंस खर्चों से जूझ रही हैं।

वित्तीय हालात की बात करें तो तस्वीर मिली-जुली है। इंडिगो (IndiGo) ने Q1 FY27 में ₹2,950 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो 56% की बढ़त है। हालांकि, एयर इंडिया (Air India) जैसे बड़े प्लेयर्स पर दबाव है, जिन्होंने पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹22,238 करोड़ का नुकसान दिखाया है। पूरे एविएशन सेक्टर का कुल नुकसान FY2027 में ₹36,000 करोड़ से ₹38,000 करोड़ के बीच रहने का अनुमान है। ऐसे में मार्केट शेयर का नुकसान एयरलाइन्स की कमर तोड़ सकता है।

एयरलाइन्स की नई रणनीति

जापान और यूरोप के अनुभव बताते हैं कि 800 किलोमीटर से कम दूरी वाले रूटों पर हाई-स्पीड रेल के आने से एयर ट्रैफिक में बड़ी गिरावट आती है। भारत की एयरलाइन्स अब अपनी कैपेसिटी को इंटरनेशनल रूट्स और लंबी दूरी वाले घरेलू रूटों की ओर शिफ्ट कर रही हैं ताकि बिजनेस को बचाया जा सके।

निवेशकों के लिए चेतावनी

हालांकि, यह बदलाव रातों-रात नहीं होगा। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स भूमि अधिग्रहण के कारण देरी का सामना कर रहे हैं। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि रेल प्रोजेक्ट्स की स्पीड, टिकटों की प्राइसिंग और एयरलाइन्स के नए रूट मैप्स पर नजर रखना अब बेहद जरूरी है। इसके अलावा, ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन और करेंसी में गिरावट जैसे एक्सटर्नल शॉक्स अभी भी सेक्टर के लिए बड़ा रिस्क बने हुए हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.