Haryana Tax Growth: अप्रैल-जुलाई में 'GST' कलेक्शन में सबसे आगे हरियाणा, UP का जलवा कायम

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AuthorMehul Desai|Published at:
Haryana Tax Growth: अप्रैल-जुलाई में 'GST' कलेक्शन में सबसे आगे हरियाणा, UP का जलवा कायम

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच, हरियाणा ने स्टेट GST (SGST) कलेक्शन में शानदार **31%** की ग्रोथ दर्ज कर सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। वहीं, कुल टैक्स कलेक्शन के मामले में उत्तर प्रदेश (UP) एक बार फिर अव्वल रहा। राष्ट्रीय GST में **15.4%** की बढ़ोतरी ने राज्यों को कैपिटल स्पेंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए और फंड्स मुहैया कराए हैं।

राज्यों के टैक्स कलेक्शन में उछाल

वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में राज्यों के टैक्स रेवेन्यू (Tax Revenue) ने दमदार परफॉरमेंस दिखाई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जुलाई की अवधि में टैक्स कलेक्शन में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ राज्य अपने टैक्स बेस को तेजी से बढ़ा रहे हैं, जबकि कुछ राज्य कुल रेवेन्यू के मामले में अपना दबदबा बनाए हुए हैं।

हरियाणा की तूफानी ग्रोथ, UP का दबदबा

ग्रोथ के मामले में हरियाणा सबसे आगे निकल गया है। अप्रैल-जुलाई की अवधि में पोस्ट-सेटलमेंट SGST कलेक्शन में 31% का ईयर-ऑन-ईयर (YoY) इजाफा हुआ है। खास तौर पर जुलाई में हरियाणा का पोस्ट-सेटलमेंट SGST ₹5,135 करोड़ रहा, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 28% ज्यादा है। इस तेज ग्रोथ से संकेत मिलता है कि हरियाणा औद्योगिक गतिविधियों और बेहतर कंप्लायंस के दम पर अपना टैक्स बेस सफलतापूर्वक बढ़ा रहा है।

हालांकि, हरियाणा ग्रोथ में भले ही आगे हो, लेकिन कुल टैक्स रेवेन्यू के मामले में उत्तर प्रदेश का जलवा कायम है। जुलाई 2026 के GST कलेक्शन में 15% की बढ़ोतरी के साथ, UP राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा रेवेन्यू जुटाने वाला राज्य बना हुआ है। यह लगातार परफॉरमेंस UP को राष्ट्रीय वित्तीय परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित करता है।

राष्ट्रीय रेवेन्यू ट्रेंड्स का असर

राज्यों का यह मजबूत प्रदर्शन राष्ट्रीय GST ट्रेंड्स के अनुरूप है। जुलाई 2026 में, राष्ट्रीय GST कलेक्शन में 15.4% की सालाना बढ़ोतरी हुई, जो ₹2.11 लाख करोड़ के पार चला गया। राष्ट्रीय रेवेन्यू में यह निरंतर वृद्धि राज्यों के बजट को और अधिक स्थिरता प्रदान करती है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने 1 अगस्त 2026 को सभी राज्यों को ₹1,09,019 करोड़ की अतिरिक्त टैक्स डिवोल्यूशन (Tax Devolution) की किस्त जारी की। यह फंड विशेष रूप से राज्यों को उनके कैपिटल और डेवलपमेंट एक्सपेंडिचर प्रोजेक्ट्स के लिए दिया गया है।

निवेशकों के लिए, टैक्स रेवेन्यू और कैपिटल स्पेंडिंग के बीच का संबंध सबसे अहम है। जब राज्य अधिक रेवेन्यू कलेक्ट करते हैं और केंद्र से समय पर टैक्स डिवोल्यूशन प्राप्त करते हैं, तो वे अक्सर इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्बन डेवलपमेंट और सोशल प्रोजेक्ट्स पर खर्च बढ़ाते हैं। राज्यों के इस बढ़ते कैपिटल एक्सपेंडिचर से कंस्ट्रक्शन, सीमेंट, स्टील और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर्स को सपोर्ट मिलता है।

हालांकि, कुछ ऐसे जोखिम भी हैं जिन पर नजर रखने की जरूरत है। कलेक्शन बढ़ तो रहा है, लेकिन इस ग्रोथ की स्थिरता डोमेस्टिक कंजम्पशन पैटर्न और इंपोर्ट पर निर्भर करती है। कंज्यूमर डिमांड में कोई भी बड़ी गिरावट या राष्ट्रीय टैक्स ढांचे में बदलाव भविष्य के अनुमानों को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, टैक्स डेटा के रिकॉन्सिलिएशन (Reconciliation) के बाद राज्य-वार ग्रोथ के अंतिम आंकड़ों में मामूली समायोजन हो सकता है। निवेशकों को यह जानने के लिए राज्यों की तिमाही कैपिटल एक्सपेंडिचर रिपोर्ट्स पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह बढ़ा हुआ राजस्व वास्तव में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन में तब्दील हो रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.