RPG Enterprises के चेयरमैन Harsh Goenka ने चेतावनी दी है कि भारतीय कंपनियां अब लॉन्ग-टर्म मैन्युफैक्चरिंग और R&D के बजाय 'एसेट-लाइट' मॉडल और पैसिव इनकम को तरजीह दे रही हैं। यह बदलाव देश की डीप-टेक ग्रोथ के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है।
RPG Enterprises के चेयरमैन Harsh Goenka ने भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर की कार्यसंस्कृति में आए बदलाव पर गंभीर चिंता जताई है। उनका मानना है कि कंपनियां अब फैक्ट्री-फ्लोर इनोवेशन और लॉन्ग-टर्म इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट का कठिन रास्ता छोड़कर, शॉर्ट-कट अपना रही हैं।\n\n### पैसिव कैपिटल की ओर झुकाव\nगोयनका के अनुसार, नई पीढ़ी के बिजनेस लीडर्स अब अपनी मेहनत से फैक्ट्रियां खड़ी करने के बजाय 'फैमिली ऑफिस' के जरिए वेल्थ मैनेजमेंट और पैसिव इनकम पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यह 'एसेट-लाइट' मॉडल भले ही निवेशकों को क्विक रिटर्न दे दे, लेकिन इसके चलते कंपनियां विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो रही हैं और खुद का ओरिजिनल इनोवेशन नहीं कर पा रही हैं।\n\n### मैन्युफैक्चरिंग पर क्या होगा असर?\nभले ही कंपनियों का प्रॉफिट अच्छा दिख रहा हो, लेकिन प्राइवेट सेक्टर कैपेक्स (Capex) यानी बड़े निवेश को लेकर अभी भी सतर्क है। पॉलिसी अनिश्चितता और तिमाही नतीजों का दबाव कंपनियों को R&D जैसे लंबे समय तक चलने वाले प्रोजेक्ट्स से दूर कर रहा है। गोयनका की यह टिप्पणी एक आईना है कि अगर भारतीय कंपनियां खुद की टेक्नोलॉजी विकसित नहीं करेंगी, तो भविष्य में ग्लोबल सप्लाई चेन में टिकना मुश्किल होगा।\n\nनिवेशकों और मार्केट के जानकारों के लिए यह एक संकेत है कि हमें केवल कंपनियों के शॉर्ट-टर्म वैल्युएशन को नहीं, बल्कि उनके लॉन्ग-टर्म विजन और कोर कैपेबिलिटीज को भी परखने की जरूरत है।
