गुजरात के जलाशयों में पानी का स्तर गिरकर **74.89%** पर आ गया है, जो पिछले साल के **86.64%** के मुकाबले काफी कम है। इस जल संकट से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि सरकार ने सिंचाई के बजाय पीने के पानी को प्राथमिकता दी है, जिससे सौराष्ट्र और कच्छ जैसे इलाकों में फसलों के नुकसान का जोखिम बढ़ गया है।
कृषि पर पड़ने वाला असर
जहां सरदार सरोवर बांध अभी 90.31% की क्षमता के साथ एक मुख्य आधार बना हुआ है, वहीं राज्य के छोटे बांधों की स्थिति चिंताजनक है। राज्य के करीब 76 जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का 25% से भी कम पानी बचा है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों जैसे कपास, मूंगफली और दालों की पैदावार पर पड़ सकता है। यदि किसानों की आय कम होती है, तो इसका नकारात्मक असर ग्रामीण मांग (Rural Demand) पर देखने को मिलेगा, जिससे FMCG और ट्रैक्टर कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी प्राथमिकताएं
पानी के समान वितरण के लिए सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई (SAUNI) योजना को सक्रिय किया गया है, ताकि नर्मदा बेसिन से पानी को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि, राज्य प्रशासन ने साफ कर दिया है कि उनकी पहली प्राथमिकता पीने का पानी और पशुओं के लिए चारा सुनिश्चित करना है। इस वजह से सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति को नियंत्रित (Rationing) किया जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आउटलुक
आने वाले समय में मानसून की आखिरी बारिश और खेतों में नमी की स्थिति पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह स्थिति न केवल कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, बल्कि बाजार में रूरल कंजम्पशन को भी धीमा कर सकती है। निवेशकों को जलाशयों में पानी के इनफ्लो और सरकारी राहत उपायों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
