Gujarat सरकार के आला अधिकारियों ने टोक्यो में बड़ी जापानी कंपनियों के साथ अहम बातचीत की है। इस दौरे का मकसद जनवरी 2027 में होने वाले Vibrant Gujarat Global Summit से पहले सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में भारी निवेश जुटाना है।
निवेश के लिए बड़ी कूटनीति
डिप्टी चीफ मिनिस्टर हर्ष संघवी के नेतृत्व में गुजरात सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में टोक्यो दौरे से लौटा है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पार्ट्स, क्लीन एनर्जी और स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स में विदेशी पूंजी को आकर्षित करना था। यह प्रयास आने वाले जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले 'वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट' की दिशा में एक अहम कदम है।
ऑटो सेक्टर में नया दांव
निवेशकों के नजरिए से यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि गुजरात अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस को तेजी से बदल रहा है। Suzuki Motor Corporation के साथ हुई बातचीत यह साफ करती है कि राज्य अब ग्लोबल इलेक्ट्रिक व्हीकल सप्लाई चेन में खुद को मजबूती से फिट करना चाहता है। वेंडर पार्कों और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देकर राज्य ऑटो सेक्टर में अपनी बादशाहत बरकरार रखने की कोशिश में है।
सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी पर फोकस
ऑटोमोबाइल के अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने Tokyo Electron जैसी दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी के साथ भी चर्चा की। भारत जिस तरह अपनी घरेलू चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रहा है, उसे देखते हुए जापान के साथ तकनीक और सप्लाई चेन साझा करना एक मास्टरस्ट्रोक हो सकता है। इसके अलावा JERA के साथ क्लीन एनर्जी और Sumitomo Chemical के साथ पेट्रोकेमिकल्स पर हुई बातचीत बड़े औद्योगिक पूंजी निवेश का संकेत है।
सरकारी स्तर पर सुलझाई मुश्किलें
जापान के 'Ministry of Economy, Trade and Industry' के साथ हुई बैठक में कारोबार में आने वाली नियामक बाधाओं (regulatory frameworks) को दूर करने पर चर्चा हुई। किसी भी विदेशी कंपनी के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है, और राज्य सरकार इसे लेकर आश्वस्त कर रही है।
निवेशकों के लिए संकेत
आने वाले महीनों में इन चर्चाओं के नतीजों पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि यह बैठकें निवेश का एक ढांचा तैयार करती हैं, लेकिन असल असर जमीन पर एग्रीमेंट साइन होने और प्रोजेक्ट्स के शुरू होने के बाद ही दिखेगा। 2027 का समिट यह तय करेगा कि इन मुलाकातों से कितने हजार करोड़ का निवेश वास्तव में गुजरात की जमीन पर उतरता है।
