गुजरात सरकार ने समुद्री संसाधनों के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पोरबंदर में **₹100 करोड़** के 'Marine Biotechnology Research & Innovation Corridor' (M-BRIC) की नींव रखी है। यह अगले **5** वर्षों में स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
गुजरात सरकार ने पोरबंदर के मोचा गांव में ₹100 करोड़ के निवेश के साथ एक नई पहल की शुरुआत की है। 'Marine Biotechnology Research & Innovation Corridor' (M-BRIC) नाम का यह प्रोजेक्ट, जिसे Gujarat State Biotechnology Mission (GSBTM) लीड कर रहा है, समुद्री संसाधनों की रिसर्च को सीधे इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग से जोड़ने का काम करेगा।
समुद्री संसाधनों से बनेगा मुनाफा
इस प्रोजेक्ट का मुख्य फोकस समुद्री बायोमास, जैसे कि सीवीड (Seaweed) और शैवाल (Algae) से कमर्शियल उत्पाद तैयार करना है। यहां स्टार्टअप्स और लोकल बिजनेस को न केवल लैब सुविधा मिलेगी, बल्कि उन्हें न्यूट्रास्यूटिकल्स, बायो-फर्टिलाइजर्स और फार्मास्यूटिकल इंटरमीडिएट्स जैसे हाई-वैल्यू उत्पाद तैयार करने में मदद दी जाएगी। हब में एक्सट्रैक्शन, क्वालिटी टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
तकनीकी साझेदारी और 'ब्लू इकोनॉमी'
प्रोजेक्ट को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए GSBTM ने CSIR-Central Salt and Marine Chemicals Research Institute (CSIR-CSMCRI) के साथ हाथ मिलाया है। इसके अलावा, सरकार Kappaphycus alvarezii जैसी प्रजातियों की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए एक 'सीवीड ब्रूड बैंक' भी तैयार करेगी। यह पूरा कदम राज्य की 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, जिससे तटीय आबादी के लिए आय के नए स्रोत पैदा होंगे।
निवेश के जोखिम और चुनौतियां
किसी भी बड़े सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तरह, इसमें भी कुछ जोखिम हैं। सबसे बड़ी चुनौती सरकारी एजेंसियों और प्राइवेट कंपनियों के बीच तालमेल बिठाने की है। साथ ही, इन प्रोडक्ट्स की कमर्शियल वायबिलिटी अभी साबित होनी बाकी है, जिसके लिए स्टार्टअप्स को ग्लोबल मार्केट्स में अपनी जगह बनानी होगी। पर्यावरण में बदलाव और पानी की क्वालिटी जैसे कारक भी इस बायोटेक हब के लिए लॉन्ग-टर्म रिस्क पैदा कर सकते हैं।
