गुजरात सरकार ने **63 लाख** से अधिक किसानों को आधार और भूमि रिकॉर्ड के जरिए एक केंद्रीकृत डिजिटल रजिस्ट्री से जोड़ा है। 'Digital Agriculture Mission' के तहत शुरू की गई यह पहल सब्सिडी वितरण और क्रेडिट एक्सेस को पारदर्शी बनाएगी।
गुजरात सरकार ने राज्य के 63 लाख से अधिक किसानों को एक यूनिफाइड 'फार्मर रजिस्ट्री' के तहत लाकर रूरल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आधार (Aadhaar) और लैंड रिकॉर्ड्स को आपस में लिंक करके हर किसान की एक यूनिक डिजिटल प्रोफाइल तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य पुरानी कागजी प्रणालियों को हटाकर प्रशासनिक कामकाज को तेज करना है।
डिजिटल मिशन और योजनाओं का लाभ
यह पहल राष्ट्रीय 'Digital Agriculture Mission' का हिस्सा है। रजिस्ट्री के जरिए हर किसान को एक 'यूनिक फार्मर आईडी' दी जा रही है। इसका इस्तेमाल प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, एमएसपी (MSP) प्रोक्योरमेंट और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाओं के लिए एक गेटवे के तौर पर होगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि वित्तीय सहायता का पैसा सही लाभार्थियों तक बिना किसी हेराफेरी के पहुंचे।
फाइनेंशियल सेक्टर के लिए मौके
निवेशकों और बैंकिंग सेक्टर के लिए यह डेटा काफी वैल्यूएबल है। लैंड और फार्मर डेटा के स्टैंडर्डाइज होने से बैंक और एनबीएफसी (NBFC) के लिए किसानों की क्रेडिटवर्थनेस को जांचना आसान होगा, जिससे ग्रामीण इलाकों में लोन वितरण में तेजी आ सकती है। इसके अलावा, एग्री-इनपुट और प्रोक्योरमेंट कंपनियों को डिमांड फोरकास्टिंग के लिए बेहतर डेटा मिल सकेगा।
चुनौतियां और डेटा सुरक्षा
इतने बड़े स्तर पर डेटा का डिजिटाइजेशन करना आसान नहीं है। सरकार ने 'अपडेट फार्मर रिक्वेस्ट' की सुविधा दी है ताकि पुराने भूमि रिकॉर्ड्स में मौजूद गलतियों को सुधारा जा सके। इसके अलावा, डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है, जिस पर आने वाले समय में निवेशकों की नजर बनी रहेगी। भविष्य में इस डेटा का इस्तेमाल एआई-ड्रिवेन एग्रीकल्चर एडवाइजरी टूल्स के साथ भी किया जाएगा।
