वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं, जहां उनका मकसद 'Make in India' को बढ़ावा देना और ग्लोबल कंपनियों के साथ सप्लाई चेन को मजबूत करना है। Target और Mondelez जैसी कंपनियों के साथ बैठकें हुई हैं, लेकिन निवेशकों की नजर ट्रेड डील की प्रगति पर टिकी है जो अभी कुछ चुनौतियों का सामना कर रही है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal 5 अक्टूबर 2026 तक अमेरिका के दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान वे मिलवॉकी में होने वाली G20 ट्रेड मिनिस्टर्स की बैठक में शामिल हो रहे हैं और नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स द्वारा आयोजित राउंडटेबल में भारत को मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने पर चर्चा कर रहे हैं।
कंपनियों के साथ रणनीतिक बैठकें
मंत्री ने Target Corporation, Mondelez International और Archer Daniels Midland के सीनियर लीडरशिप के साथ चर्चा की है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य इन ग्लोबल दिग्गजों को भारत में अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि वे घरेलू बाजार के साथ-साथ दुनिया भर में निर्यात कर सकें।
ट्रेड डील और जियोपॉलिटिकल चुनौतियां
निवेशकों के लिए कॉर्पोरेट मीटिंग्स अहम हैं, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच होने वाली बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (Bilateral Trade Agreement) पर सबकी निगाहें हैं। हालांकि दोनों देश डील के पक्ष में हैं, लेकिन यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव Jamieson Greer के मुताबिक, कुछ तकनीकी और नीतिगत अनसुलझे मुद्दों के कारण फिलहाल अंतरिम समझौता (Interim Trade Deal) तुरंत होना मुश्किल है।
रिस्क फैक्टर: नए कानून का असर
बाजार की चिंता 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' को लेकर भी है। इस कानून के तहत उन देशों पर ऊंचे टैरिफ लग सकते हैं जो रूसी तेल का आयात करते हैं। यह स्थिति भविष्य में ट्रेड रिलेशंस और इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। फिलहाल, निवेशकों को ट्रेड नेगोशिएशंस के अगले दौर का इंतजार है।
