Ministry of MSMEs ने छोटे उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए National Small Industries Corporation (NSIC) के जरिए रॉ मटेरियल प्रोक्योरमेंट को साल 2030 तक **9,00,000 टन** सालाना करने का लक्ष्य रखा है।
सरकार ने MSMEs सेक्टर को मजबूती देने के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है। फिलहाल यह आंकड़ा 3,00,000 टन है, जिसे बढ़ाकर 9,00,000 टन तक ले जाने की तैयारी है। इसका सीधा मकसद छोटे व्यापारियों को मार्केट में होने वाली हलचल से बचाना है।
कैसे काम करेगा यह मॉडल?
NSIC यहाँ एक 'डिमांड एग्रीगेटर' की भूमिका निभाएगी। जब कई छोटे उद्यम अपनी मांग को एक साथ जोड़ेंगे, तो बल्क प्रोक्योरमेंट के जरिए सप्लायर्स से बेहतर मोल-भाव करना आसान होगा। अनुमान है कि इस रणनीति से छोटे व्यापारियों की लागत में 3% से 5% तक की सीधी कटौती होगी। इसके अलावा, NSIC इन कंपनियों को क्रेडिट सपोर्ट भी देगी, जिससे वर्किंग कैपिटल की समस्या कम होगी।
ग्लोबल संकट से बचाव
मौजूदा समय में वेस्ट एशिया जैसे इलाकों में जारी तनाव के कारण माल ढुलाई (freight) और रॉ मटेरियल की उपलब्धता पर बुरा असर पड़ा है। छोटे उद्योगों के लिए ये बाहरी झटके अक्सर मुनाफे पर भारी पड़ते हैं। अब सरकार इन कमोडिटीज को अपने प्लेटफॉर्म के दायरे में लाकर छोटे बिजनेस को ग्लोबल अनिश्चितता से बचाना चाहती है।
हालांकि, इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि NSIC अलग-अलग इंडस्ट्रीज की मांग को कैसे मैनेज करती है और बल्क मैन्युफैक्चरर्स के साथ किस तरह के तालमेल बिठाती है।
