सरकार ने BSNL और MTNL पर बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 में **₹9,000 करोड़** की एसेट मोनेटाइजेशन (Asset Monetization) का लक्ष्य रखा है।
कर्ज के बोझ से मुक्ति की राह
भारत सरकार ने अपनी टेलीकॉम कंपनियों BSNL और MTNL की खस्ताहाल बैलेंस शीट को सुधारने के लिए कमर कस ली है। इस पहल के तहत, सरकारी संपत्तियों को बेचकर ₹9,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना मुख्य रूप से भारी-भरकम कर्ज के बोझ को हल्का करने के लिए बनाई गई है।
कैसे काम करेगी नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC)?
इस पूरी प्रक्रिया की कमान NLMC के हाथों में है, जो अब मनमाने तरीके से नहीं बल्कि एक व्यवस्थित ढांचे के साथ काम कर रही है। सबसे बड़ी चुनौती जमीन के टाइटल विवादों को सुलझाने की थी, जो अक्सर दूरसंचार विभाग और डाक विभाग के बीच फंसे रहते थे। अब करीब 862 प्रॉपर्टीज के ओनरशिप पर स्थिति साफ कर दी गई है। एक अंतर-मंत्रालयी पैनल ने MTNL की ₹1,100 करोड़ की गैर-जरूरी (non-core) संपत्तियों को बेचने की भी सिफारिश की है।
वित्तीय स्थिति और चुनौतियां
फिलहाल MTNL का कर्ज ₹10,000 करोड़ के पार है और BSNL पर भी काफी लायबिलिटीज हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एसेट सेल से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल केवल कर्ज चुकाने (Debt Resolution) के लिए होगा, न कि सैलरी या डेली ऑपरेटिंग खर्चों के लिए। अपनी दक्षता बढ़ाने के लिए BSNL अब दिल्ली और मुंबई में MTNL का टेलीकॉम बिजनेस संभालने का करार भी कर चुका है।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
निवेशकों को यह समझना होगा कि इस योजना की सफलता पूरी तरह से 'एग्जीक्यूशन' पर टिकी है। जमीन के कागजात और रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की प्रक्रिया धीमी रही है, जो भविष्य में देरी का कारण बन सकती है। इसके अलावा, MTNL के लगातार ऑपरेटिंग घाटे और लंबी अवधि के कर्ज के पुनर्गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिस पर निवेशकों को बारीक नजर रखनी चाहिए।
