सरकार ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा कारणों से इथेनॉल को घरों में खाना पकाने के ईंधन के तौर पर या डीजल में मिलाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि वैज्ञानिक जांच में आग के बड़े जोखिम सामने आए हैं। इस फैसले से इथेनॉल इंडस्ट्री के लिए डिमांड का रास्ता अब केवल पेट्रोल ब्लेंडिंग तक सीमित रहेगा।
इथेनॉल को कुकिंग और डीजल में मिलाने पर रोक
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इथेनॉल को घरों में खाना पकाने के ईंधन के तौर पर या डीजल के साथ मिलाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री, सुरेश गोपी ने राज्यसभा को 10 अगस्त, 2026 को सूचित किया कि इन उपयोगों के लिए बायोफ्यूल (biofuel) को पेश करने की कोई नीति फिलहाल विचाराधीन नहीं है। इस ऐलान के साथ ही, घरों में खाना पकाने के लिए लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) ही मुख्य ईंधन बनी रहेगी।
सुरक्षा चिंताएं बनीं बड़ी वजह
यह फैसला सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं और वाहन निर्माताओं के सहयोग से की गई विस्तृत वैज्ञानिक जांच के बाद लिया गया है। इन जांचों में डीजल में इथेनॉल मिलाने को लेकर एक बड़ा सुरक्षा जोखिम पाया गया। इथेनॉल मिलाने से डीजल का फ्लैश पॉइंट (flash point) काफी कम हो जाता है। फ्लैश पॉइंट वह न्यूनतम तापमान होता है जिस पर कोई तरल पदार्थ हवा के संपर्क में आने पर आग पकड़ सकता है। कम फ्लैश पॉइंट होने से स्टोरेज, हैंडलिंग और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, सरकार ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इथेनॉल-मिश्रित डीजल सुरक्षित उपयोग के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करता है।
इथेनॉल इंडस्ट्री पर असर
इथेनॉल उत्पादन और चीनी उद्योगों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, यह स्पष्टीकरण डिमांड की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। कई कंपनियों ने राष्ट्रीय बायोफ्यूल लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपनी डिस्टिलरी क्षमताएं (distillery capacities) बढ़ाई हैं। सरकार द्वारा कुकिंग फ्यूल और डीजल ब्लेंडिंग जैसे नए डिमांड चैनल्स को खारिज करने के बाद, इथेनॉल उत्पादकों के लिए तत्काल वृद्धि का रास्ता मौजूदा 20% (E20) पेट्रोल ब्लेंडिंग प्रोग्राम तक ही सीमित रहेगा। इस क्षेत्र की कंपनियों को अब नई खपत के रास्ते खुलने की उम्मीद के बजाय, मौजूदा नियमों के तहत अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग करने पर ध्यान देना होगा।
आगे की नीति
सरकार ने स्वीकार किया है कि इथेनॉल में लंबी अवधि में भारत की इम्पोर्टेड एनर्जी (imported energy) पर निर्भरता कम करने की क्षमता है। हालांकि, अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी वैकल्पिक उपयोग की ओर बढ़ने के लिए और अधिक विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन की आवश्यकता होगी। फिलहाल, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के प्रतिशत को मौजूदा 20% की सीमा से आगे बढ़ाने की कोई आधिकारिक योजना नहीं है। निवेशक इस बात पर नजर रख सकते हैं कि इथेनॉल निर्माता अपनी सप्लाई और प्रोडक्शन मार्जिन (production margins) का प्रबंधन कैसे करते हैं, खासकर जब ट्रांसपोर्ट सेक्टर से पेट्रोल ब्लेंडिंग की डिमांड पर निर्भरता बनी हुई है।
