केंद्र सरकार ने राज्यों को **₹1.09 लाख करोड़** की टैक्स डिवोल्यूशन राशि तय समय से 5 दिन पहले ही जारी कर दी है। इस कदम का मकसद राज्यों में लिक्विडिटी बढ़ाना और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को रफ्तार देना है।
लिक्विडिटी इंजेक्शन का मकसद
केंद्र सरकार ने 5 नवंबर, 2026 को टैक्स डिवोल्यूशन के तहत ₹1.09 लाख करोड़ की राशि जारी की है। यह मासिक किस्त मूल रूप से 10 नवंबर को दी जानी थी, लेकिन राज्यों की तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए इसे 5 दिन पहले 'फ्रंटलोड' कर दिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि इससे ठीक पहले 31 अक्टूबर, 2026 को भी सरकार ने इतनी ही राशि जारी की थी, यानी बहुत कम समय में राज्यों के खजाने में बड़ी रकम पहुंची है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केट पर असर
निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है क्योंकि राज्य सरकारें कंस्ट्रक्शन, सीमेंट, स्टील और सड़क जैसे सेक्टरों में बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) करती हैं। फंड समय पर मिलने से राज्यों में अटके हुए प्रोजेक्ट्स के बिल क्लियर होने की उम्मीद है, जिससे इंफ्रा और कैपिटल गुड्स कंपनियों के रेवेन्यू में इजाफा हो सकता है।
राज्यों को मिला हिस्सा
मौजूदा फॉर्मूले के तहत, केंद्र अपने टैक्स कलेक्शन का 41% हिस्सा राज्यों के साथ शेयर करता है। इस बार के आवंटन में उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा ₹19,208 करोड़, बिहार को ₹10,845 करोड़ और मध्य प्रदेश को ₹8,010 करोड़ मिले हैं।
रिस्क फैक्टर और आगे की राह
बाजार के जानकारों का मानना है कि केवल फंड जारी करना ही काफी नहीं है, इसका सही इस्तेमाल देखना जरूरी है। अगर राज्य इन पैसों का उपयोग नए प्रोजेक्ट्स के बजाय पुराने कर्ज चुकाने में करते हैं, तो इकॉनमी पर इसका असर सीमित हो सकता है। निवेशकों को आने वाले महीनों में राज्यों द्वारा बजट के यूटिलाइजेशन और नए प्रोजेक्ट्स के कमीशनिंग डेटा पर नजर रखनी चाहिए, जिससे पता चलेगा कि यह लिक्विडिटी असल में डिमांड को कितना बूस्ट दे पा रही है।
