केंद्र सरकार ने एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के **11** एयरपोर्ट्स को प्राइवेट हाथों में सौंपने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए **5** रीजनल बंडल्स बनाए गए हैं, जिनसे करीब **₹8,622 करोड़** का प्राइवेट निवेश जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्र सरकार ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेटाइजेशन प्लान के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। 4 अगस्त 2026 को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC) ने 11 एयरपोर्ट्स को प्राइवेट ऑपरेटर्स को सौंपने को आधिकारिक हरी झंडी दे दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी खजाने पर मेंटेनेंस का बोझ कम करना और एयरपोर्ट्स को प्रोफेशनल तरीके से चलाना है।
5 बंडल्स की रणनीति
प्राइवेट ऑपरेटर्स के लिए इन प्रोजेक्ट्स को आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने इन्हें 5 अलग-अलग बंडल्स में बांटा है। इस रणनीति के तहत मुनाफा कमाने वाले बड़े एयरपोर्ट्स को छोटे और कम मुनाफे वाले एयरपोर्ट्स (जैसे वाराणसी-गया-कुशीनगर और भुवनेश्वर-हुबली) के साथ जोड़ा गया है। सरकार की कोशिश है कि बिजी एयरपोर्ट्स का मुनाफा छोटे एयरपोर्ट्स के विकास में काम आए और 50 साल की लीज अवधि में पूरा पोर्टफोलियो सस्टेनेबल रहे।
इन्वेस्टमेंट और जोखिम
इस प्रोजेक्ट में प्राइवेट प्लेयर्स से कुल ₹8,622 करोड़ के निवेश की उम्मीद है। हालांकि, निवेशकों को एयर ट्रैफिक ग्रोथ पर नजर रखनी होगी, जो फिलहाल घटकर 4.4% के आसपास आ गई है। यदि पैसेंजर ट्रैफिक में तेजी नहीं आती है, तो ऑपरेटर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
रिस्क मैनेजमेंट
कर्ज के जाल (Debt Trap) को रोकने के लिए सरकार ने एक बिडर द्वारा लिए जा सकने वाले बंडल्स की संख्या पर कैप लगाने की योजना बनाई है। साथ ही, ट्रांजिशन पीरियड के दौरान 60% मौजूदा AAI कर्मचारियों को कम से कम 3 साल तक बनाए रखना अनिवार्य होगा। अब बाजार की नजर इस बिडिंग प्रोसेस और सरकार द्वारा तय की जाने वाली अंतिम वित्तीय शर्तों पर टिकी है।
