वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2027 के लिए **₹12.22 लाख करोड़** के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) का ऐलान किया है। पिछले साल के मुकाबले यह **11.5%** की बढ़ोतरी है, जिसका मकसद देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को रफ्तार देना है।
सरकारी खर्च ही ग्रोथ का इंजन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि जब तक प्राइवेट सेक्टर का निवेश पूरी तरह रफ्तार नहीं पकड़ता, तब तक सरकार खुद इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश जारी रखेगी। वित्त वर्ष 2026 के रिवाइज्ड एस्टिमेट ₹10.96 लाख करोड़ के मुकाबले, अगले साल का ₹12.22 लाख करोड़ का बजट निर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र की कंपनियों के लिए बड़ी खबर है।
किन सेक्टरों को मिलेगा बूस्ट?
यह निवेश मुख्य रूप से रेलवे, नेशनल हाईवे, पावर और पोर्ट्स (Ports) जैसे सेक्टर्स पर केंद्रित है। सीमेंट, स्टील और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी कंपनियों को इन बड़े प्रोजेक्ट्स से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम प्राइवेट प्लेयर्स के लिए एक आधार तैयार करने की कोशिश है ताकि वे आगे चलकर अपने एक्सपेंशन प्लान पर काम शुरू करें।
रिस्क और फिस्कल अनुशासन का बैलेंस
बड़ी स्पेंडिंग के बीच सरकार फिस्कल डिसिप्लिन को लेकर भी सतर्क है। FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 4.3% रखा गया है। हालांकि, ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई जैसे फैक्टर इस बजट की लागत बढ़ा सकते हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार टैक्स कलेक्शन के जरिए इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा कर पाती है, क्योंकि किसी भी बड़े विचलन की स्थिति में सरकारी खर्च की रफ्तार धीमी हो सकती है।
