जेट फ्यूल में इथेनॉल की मिलावट की खबरें गलत: सरकार का बड़ा बयान

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
जेट फ्यूल में इथेनॉल की मिलावट की खबरें गलत: सरकार का बड़ा बयान

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में इथेनॉल मिलाया जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि यह खबर झूठी है और इसका सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) से कोई लेना-देना नहीं है।

क्या जेट फ्यूल में मिलेगा इथेनॉल? सरकार ने किया इनकार

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हाल ही में फैली उन अफवाहों पर कड़ा रुख अपनाया है जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में इथेनॉल मिलाने की योजना बना रही है। केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू किंजरपू ने इन खबरों को 'पूरी तरह से झूठा और गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया है और कहा है कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर उड़ी इन दावों के बाद यह स्पष्टीकरण जारी किया है, जिनसे उड़ान सुरक्षा और ईंधन की मिलावट को लेकर चिंताएं पैदा हो गई थीं।

इथेनॉल और SAF में है बड़ा अंतर

सरकार ने साफ किया है कि इथेनॉल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) दो बिल्कुल अलग उत्पाद हैं। इथेनॉल का इस्तेमाल मुख्य रूप से सड़क परिवहन में फ्यूल एडिटिव के तौर पर होता है, जैसे कि भारत में गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला E20 पेट्रोल। लेकिन, यह विमानन ईंधन के लिए नियामक ढांचे का हिस्सा नहीं है।

इसके विपरीत, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित उत्पाद है जो इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) द्वारा तय किए गए कड़े सुरक्षा मानकों को पूरा करता है। SAF खास तौर पर विमान इंजनों के लिए ही बनाया गया है और यह एविएशन इंडस्ट्री की दीर्घकालिक पर्यावरणीय रणनीति का एक अहम हिस्सा है, न कि सिर्फ एक फ्यूल एडिटिव।

निवेशकों के लिए क्या है अहम?

बाजार के प्रतिभागियों के लिए यह अंतर समझना बहुत महत्वपूर्ण है। विमानन क्षेत्र फिलहाल क्लीनर फ्यूल्स की ओर धीरे-धीरे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर SAF की ब्लेंडिंग के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं: 2027 तक 1%, 2028 तक 2%, और 2030 तक 5%। ये नीतियां ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए लागू इथेनॉल ब्लेंडिंग जनादेशों से पूरी तरह अलग हैं।

सरकार का यह कदम सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने और विमानन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के इरादे को दर्शाता है। जेट फ्यूल में इथेनॉल के इस्तेमाल की अफवाहों को खारिज करके, मंत्रालय ने यात्रियों के बीच अनावश्यक चिंता को रोकने की कोशिश की है। ऊर्जा और विमानन क्षेत्र पर नजर रखने वाले निवेशकों को SAF के कार्यान्वयन से संबंधित आधिकारिक सरकारी नीति दस्तावेजों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही उद्योग के क्लीनर फ्यूल की ओर बदलाव का मुख्य रोडमैप हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.