केंद्र सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अपने ग्रॉस बॉरोइंग टारगेट को **₹17.20 लाख करोड़** से घटाकर **₹15.99 लाख करोड़** कर दिया है। सरकारी सिक्योरिटीज की सप्लाई घटने के बावजूद बॉन्ड मार्केट में सुस्ती है और **10-वर्षीय यील्ड (Yield)** **7.21%** के स्तर पर स्थिर बनी हुई है।
सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए अपने बाजार उधारी के लक्ष्य में लगभग ₹1.2 लाख करोड़ की कटौती की है। आमतौर पर जब सरकारी उधारी घटती है, तो बॉन्ड की कीमतें बढ़ती हैं और ब्याज दरें गिरती हैं, लेकिन इस बार मार्केट का रिएक्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड अभी भी 7.21% के करीब बनी हुई है।
फिस्कल डिसिप्लिन और उधारी का गणित
सरकार ने दूसरी छमाही के लिए ₹7.86 लाख करोड़ की उधारी का शेड्यूल तय किया है, जिसे 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिए पूरा किया जाएगा। हालांकि ग्रॉस बॉरोइंग में कमी आई है, लेकिन नेट बॉरोइंग टारगेट ₹11.73 लाख करोड़ पर स्थिर है। इसका सीधा मतलब है कि सरकार 4.3% के फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने अनुशासन पर कायम है।
क्यों सतर्क है बाजार?
निवेशकों की चिंता के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
राज्यों की बढ़ती उधारी: केंद्र की कटौती के बावजूद, विभिन्न राज्य सरकारें भारी मात्रा में कर्ज ले रही हैं। इससे सिस्टम में लिक्विडिटी की मांग बढ़ जाती है, जो ब्याज दरों को ऊंचा रखने का दबाव बनाती है।
महंगाई का डर: रिटेल महंगाई के दबाव के कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अगली चाल पर सबकी नजर है। अगर RBI ब्याज दरों को ऊंचा रखता है या टाइट मॉनेटरी पॉलिसी अपनाता है, तो बॉन्ड यील्ड में राहत मिलने की उम्मीद कम हो जाएगी।
डेट मैनेजमेंट: सरकार अब लंबे समय वाली सिक्योरिटीज पर फोकस कर रही है। इसमें ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (Sovereign Green Bonds) भी शामिल हैं, ताकि निवेशक आधार को और व्यापक बनाया जा सके।
फिलहाल, निवेशकों की नजरें आने वाले इन्फ्लेशन डेटा और RBI की पॉलिसी कमेंट्री पर टिकी हैं। जब तक महंगाई को लेकर स्थिति साफ नहीं होती, बॉन्ड मार्केट में सतर्कता बनी रहने की संभावना है।
