सरकार ONDC-आधारित प्लेटफॉर्म 'DigiDukaan' को बड़े पैमाने पर उतारने की तैयारी कर रही है। यह पहल देश के **21,000** से ज्यादा रिटेलर्स को **450** ब्रांड्स से सीधे जोड़ेगी, ताकि पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूटर की बाधाओं को खत्म किया जा सके।
भारत सरकार देश के रिटेल सेक्टर को आधुनिक बनाने के लिए 'DigiDukaan' को तेजी से आगे बढ़ा रही है। फिलहाल हैदराबाद, जयपुर और मुंबई में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चल रही यह सेवा, किराना दुकानदारों और FMCG कंपनियों के बीच के पुराने, मैन्युअल ऑर्डरिंग सिस्टम को पूरी तरह बदलने का लक्ष्य रखती है।
अब तक का प्रोग्रेस
सितंबर 2026 तक, यह प्लेटफॉर्म 21,000 से अधिक रिटेलर्स को 450 से ज्यादा बड़े ब्रांड्स से जोड़ चुका है। इस प्रोजेक्ट को तब बड़ी गति मिली जब 30 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक CEO राउंडटेबल की अध्यक्षता की, जिसमें FMCG कंपनियों को इस डिजिटल फ्रेमवर्क को पूरे देश में लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
क्या बदलेगा सप्लाई चेन में?
पारंपरिक रूप से, किराना दुकानदार अपनी दुकान में सामान भरने के लिए दर्जनों अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूटर्स पर निर्भर रहते हैं। 'DigiDukaan' इस प्रक्रिया को एक डिजिटल मार्केटप्लेस में बदल देगा, जिससे दुकानदारों को प्रोक्योरमेंट के लिए एक ही 'सिंगल विंडो' मिलेगी। इससे इन्वेंट्री मैनेजमेंट बेहतर होगा और दुकानदारों का वर्किंग कैपिटल भी बचेगा।
चुनौतियां और रिस्क (Risks)
हालांकि, यह डिजिटल बदलाव आसान नहीं होगा। सबसे बड़ा खतरा मौजूदा डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क से है, जो दुकानदारों को क्रेडिट और पर्सनल रिलेशनशिप जैसी सुविधाएं देते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए तुरंत इन सुविधाओं की जगह लेना एक बड़ी चुनौती है। साथ ही, अलग-अलग सप्लायर्स की डिलीवरी फीस और रिटर्न पॉलिसी का एक जैसा न होना भी छोटे दुकानदारों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि FMCG कंपनियां अपने पुराने सिस्टम को छोड़कर कितनी तेजी से इस नए ओपन-नेटवर्क के साथ जुड़ती हैं।
