भारतीय सरकार ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब यूरोपीय यूनियन (EU) के कड़े नियमों को पूरा करने में आने वाले सर्टिफिकेशन का सारा खर्च सरकार उठाएगी, ताकि एक्सपोर्टर्स को वित्तीय बाधाओं से बचाया जा सके।
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों को राहत देने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की है कि सरकार अब उन सर्टिफिकेशन लागतों का पूरा खर्च उठाएगी, जिन्हें वहन करना छोटे एक्सपोर्टर्स के लिए कठिन होता है। ये खर्च मुख्य रूप से यूरोपीय यूनियन के CBAM (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) और EUDR (EU डिफॉरेस्टेशन रेगुलेशन) जैसे सख्त अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए जरूरी होते हैं।\n\nयूरोपीय यूनियन के ये नियम नॉन-टैरिफ बैरियर्स की तरह काम करते हैं। इसके लिए कंपनियों को महंगे टेस्टिंग और इंस्पेक्शन प्रोसेस से गुजरना पड़ता है, जिससे कई बार छोटी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर बुरा असर पड़ता है और वे वैश्विक बाजार में पिछड़ने लगती हैं।\n\n### सरकारी मदद और स्कीम का दायरा\n\nयह नई मदद 'एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन' के तहत दी जाएगी, जिसके लिए ₹25,060 करोड़ का आउटले रखा गया है। इसे TRACE (ट्रेड रेगुलेशंस, एक्रेडिटेशन एंड कंप्लायंस इनेबलमेंट) प्रोग्राम के जरिए मैनेज किया जाएगा। जिन एक्सपोर्टर्स के पास वैध इम्पोटर एक्सपोर्टर कोड और उद्यम रजिस्ट्रेशन नंबर है, वे विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के जरिए इस वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं।\n\n### क्यों जरूरी था यह फैसला?\n\nफाइनेंशियल ईयर 2025-26 में यूरोपीय यूनियन को होने वाले भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 4.57% की गिरावट आई, जो घटकर USD 72.4 बिलियन रह गया। चूंकि भारत का कुल निर्यात का लगभग 17% हिस्सा यूरोपीय बाजार से आता है, इसलिए सरकार रेगुलेटरी अड़चनों को दूर करने को प्राथमिकता दे रही है।\n\n### निवेशकों के लिए टेकअवे\n\nलंबी अवधि में यह पॉलिसी सप्लाई चेन को स्थिर करने में मददगार साबित हो सकती है। कई छोटी कंपनियां बड़ी लिस्टेड एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड फर्मों की सप्लायर होती हैं। यदि छोटी कंपनियां बिना वित्तीय बोझ के नियमों का पालन कर पाती हैं, तो इससे बड़ी कंपनियों के लिए सप्लाई में रुकावट का रिस्क कम होगा। अब देखना यह होगा कि इस स्कीम को कितनी तेजी से लागू किया जाता है और क्या इससे एक्सपोर्ट वॉल्यूम में वास्तविक सुधार देखने को मिलता है।
