वित्त मंत्रालय जल्द ही PPF और SCSS जैसी स्मॉल सेविंग्स स्कीमों के लिए नई ब्याज दरों का ऐलान करने वाला है। अगस्त में महंगाई **4.82%** रहने और बॉन्ड यील्ड में उछाल के बीच निवेशकों की नजरें इस बदलाव पर टिकी हैं, क्योंकि पिछले नौ क्वार्टर से दरें स्थिर बनी हुई हैं।
केंद्र सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीमों की ब्याज दरों की समीक्षा करने की तैयारी कर रही है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) जैसे सरकारी उपकरणों में निवेश करने वालों के लिए यह एक अहम फैसला होगा, जो अगले 3 महीने के रिटर्न की तस्वीर साफ करेगा।
क्यों है बदलाव की चर्चा?
पिछले 9 क्वार्टर से सरकार ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन इस बार आर्थिक संकेत कुछ अलग कहानी कह रहे हैं। सरकारी सिक्योरिटीज़ की यील्ड 7% के स्तर को पार कर चुकी है। इसके साथ ही, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.82% रही, जिससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या निवेशकों को बढ़ती महंगाई से बचाने के लिए रिटर्न में बढ़ोतरी जरूरी है।
सरकार का गणित
हालांकि ब्याज दरें तय करने के लिए एक स्टैंडर्ड फॉर्मूला है, लेकिन सरकार इसे पूरी तरह मानने के लिए बाध्य नहीं है। वित्त मंत्रालय अक्सर सरकारी उधारी की लागत और व्यापक आर्थिक लक्ष्यों को ध्यान में रखकर फैसला लेता है। इस कारण, फॉर्मूला कोई भी सुझाव दे, अंतिम निर्णय सरकार के हाथ में ही रहता है।
मौजूदा स्थिति पर एक नजर
फिलहाल, PPF पर निवेशकों को 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है, जबकि SCSS और सुकन्या समृद्धि योजना में यह दर 8.2% है। अन्य स्कीमों जैसे नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट पर 6.7% से 7.7% तक का रिटर्न मिल रहा है। ये स्कीम सरकारी गारंटी के कारण सुरक्षित निवेश का सबसे पसंदीदा जरिया बनी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि वित्त मंत्रालय की अगली अधिसूचना क्या संकेत देती है—क्या सरकार फिस्कल स्टेबिलिटी को प्राथमिकता देगी या निवेशकों को तोहफा देगी?
