सरकार ने National Land Monetization Corporation के जरिए चालू फाइनेंशियल ईयर में ₹15,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें से ₹9,000 करोड़ की डील फाइनल हो चुकी है, जिसका मकसद MTNL, BSNL और RINL जैसी सरकारी कंपनियों का कर्ज कम करना है।
केंद्र सरकार National Land Monetization Corporation (NLMC) के जरिए सरकारी कंपनियों के बेकार पड़े लैंड एसेट्स से वैल्यू अनलॉक करने की प्रक्रिया तेज कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए ₹15,000 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है। नवंबर 2026 तक सरकार ₹9,000 करोड़ के सौदे फाइनल कर चुकी है, जो खाली पड़ी जमीन को पूंजी में बदलने की दिशा में बड़ा कदम है।
कर्ज में डूबी कंपनियों को मिलेगी राहत
यह एसेट मोनेटाइजेशन ड्राइव भारी कर्ज से जूझ रही पब्लिक सेक्टर कंपनियों के लिए एक फाइनेंशियल लाइफलाइन की तरह काम करेगी। अपनी गैर-जरूरी रियल एस्टेट को बेचकर MTNL, BSNL और Rashtriya Ispat Nigam (RINL) अपनी बैलेंस शीट सुधार सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, MTNL पर फिलहाल ₹40,000 करोड़ का भारी कर्ज है। इन कंपनियों के लिए जमीन बेचना केवल एसेट कम करना नहीं, बल्कि उन कर्ज की देनदारियों को निपटाना है जो इनके ऑपरेशन पर दबाव डाल रही हैं।
ऑक्शन और भविष्य की राह
NLMC पारदर्शिता और बेहतर प्राइस डिस्कवरी के लिए ई-ऑक्शन (e-auctions) पर जोर दे रही है। हाल ही में विशाखापत्तनम में RINL के प्लॉट बेचे गए हैं। इसके अलावा Hindustan Insecticides Limited (HIL), Hindustan Machine Tools (HMT) और ITI जैसी कंपनियों की जमीन का प्रबंधन भी इसी के जरिए हो रहा है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Reality Check)
भले ही यह एक बड़ा पॉलिसी कदम है, लेकिन इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण है। रियल एस्टेट मार्केट की मांग में उतार-चढ़ाव और कानूनी विवाद अक्सर प्रक्रिया में देरी का कारण बनते हैं। उदाहरण के लिए, RINL की पिछली कुछ सेल में कोर्ट संबंधी अड़चनें सामने आई थीं।
अब निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि यह बिक्री कितनी जल्दी कैश फ्लो में बदलती है। MTNL के आगामी तिमाही नतीजों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एसेट सेल से मिला पैसा वास्तव में कर्ज कम कर रहा है या ऑपरेशनल घाटा अभी भी भारी है।
