वित्त मंत्रालय इक्विटी टैक्स स्ट्रक्चर की समीक्षा कर रहा है, जिसमें STT और कैपिटल गेन्स टैक्स के नियमों में बदलाव की संभावना है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, ये बदलाव फरवरी 2027 के यूनियन बजट में पेश किए जा सकते हैं।
वित्त मंत्रालय ने इक्विटी टैक्सेशन में सुधार के लिए आंतरिक परामर्श शुरू कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि वर्तमान टैक्स स्ट्रक्चर, जिसमें Securities Transaction Tax (STT) और Long-Term Capital Gains (LTCG) शामिल हैं, बाजार और निवेशकों पर क्या असर डाल रहे हैं। यह चर्चा अभी शुरुआती चरण में है और सरकार अपनी राजकोषीय स्थिरता (Fiscal Stability) को बनाए रखने के लिए बेहद सतर्क रुख अपना रही है।
क्यों हो रही है समीक्षा?
यह समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय बाजार को Foreign Portfolio Investors (FPIs) की लगातार बिकवाली का सामना करना पड़ा है। SEBI ने भी निवेश को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए टैक्स बोझ को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। फिलहाल, निवेशक ₹1.25 लाख से अधिक के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर 12.5% और शॉर्ट-टर्म गेन्स पर 20% टैक्स दे रहे हैं।
क्या हो सकते हैं अहम बदलाव?
सरकार STT की समीक्षा के साथ-साथ होल्डिंग पीरियड में बदलाव पर भी विचार कर रही है। एक प्रस्ताव यह है कि लॉन्ग-टर्म निवेश को बढ़ावा देने के लिए होल्डिंग पीरियड को बढ़ाकर 3 साल किया जाए। साथ ही, रिटेल निवेशकों और कंपनी प्रमोटरों के लिए टैक्स नियमों में अंतर करने पर भी विचार किया जा रहा है।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तत्काल राहत की उम्मीद न रखें, क्योंकि किसी भी बड़े बदलाव के लिए बजट का इंतजार करना होगा। नीतिगत फैसलों के लिए फरवरी 2027 के बजट का इंतजार करना सबसे सही होगा।
