सरकार एक विशेष संसद सत्र (Special Parliamentary Session) बुलाने की तैयारी में है। इसका मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) बिल को फिर से पेश करना है। इससे पहले संवैधानिक संशोधनों के लिए जरूरी बहुमत न मिल पाने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका था।
बहुमत का गणित और चुनौतियां
संवैधानिक संशोधन बिल को पास कराने के लिए सरकार को सदन में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो मौजूदा 540 सदस्यीय सदन में लगभग 360 वोटों के बराबर है। हालांकि NDA के पास सामान्य बहुमत मौजूद है, लेकिन संवैधानिक दहलीज को पार करने के लिए उसे अन्य दलों के समर्थन की जरूरत है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि Trinamool Congress और Shiv Sena (UBT) के नेताओं के दल-बदल को इस आंकड़े को पूरा करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जोड़-तोड़ और समय सीमा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार Dravida Munnetra Kazhagam जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ भी बातचीत कर रही है। सरकार का प्रयास है कि यह सत्र 12वें BRICS संसदीय मंच (जो 26 और 27 अक्टूबर को Samvidhan Sadan में होना है) के साथ न टकराए। इसके लिए जल्द ही औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है, जिसमें सांसदों को तैयारी के लिए एक हफ्ते का समय दिया जा सकता है।
बाजार के लिए क्या मायने हैं?
इन्वेस्टर्स के लिए इस तरह के विधायी बदलाव गवर्नेंस और पॉलिसी की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। मार्केट हमेशा एक स्टेबल और प्रेडिक्टेबल माहौल पसंद करता है। डेलिमिटेशन जैसे बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव राज्यों के पॉलिटिकल लैंडस्केप को बदल सकते हैं। यदि सरकार इन बड़े बिलों को पास कराने में सफल रहती है, तो इसे मजबूत गवर्नेंस और सरकार के कंट्रोल का संकेत माना जाएगा, जो लंबी अवधि में मार्केट सेंटीमेंट को बूस्ट कर सकता है।
