सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) हाईवे कॉन्ट्रैक्टर्स को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। बिटुमेन की कीमतों में आ रही अस्थिरता को देखते हुए सरकार इस रिलीफ मैकेनिज्म को सितंबर 2026 के आगे भी बढ़ाने पर विचार कर रही है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) हाईवे बनाने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत योजना पर काम कर रहा है। बिटुमेन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए, सरकार इस मौजूदा रिलीफ मैकेनिज्म को सितंबर 2026 की समय सीमा से आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। इस पर अंतिम फैसला अगले महीने लिया जा सकता है।
प्रोजेक्ट्स पर असर और चुनौतियां
बिटुमेन किसी भी सड़क निर्माण में 5% से 10% तक की लागत रखता है। हाल ही में बल्क VG-40 बिटुमेन की कीमतें ₹72,792 से ₹75,360 प्रति टन के बीच रही हैं। पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव के कारण भारत के आयात पर बुरा असर पड़ा है। कई फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों में बदलाव की सुविधा न होने के कारण, कंपनियों को मार्जिन पर बड़ा दबाव झेलना पड़ता है, जिससे प्रोजेक्ट्स में देरी की आशंका बनी रहती है।
स्ट्रक्चरल रिस्क और निर्भरता
भारत अपनी कुल बिटुमेन जरूरत का 33% से 40% हिस्सा आयात करता है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी एशियाई देशों से आता है। रिफाइनरियां भी अक्सर बिटुमेन की जगह डीजल और गैसोलीन जैसे अधिक वैल्यू वाले उत्पादों को प्राथमिकता देती हैं, जिससे सप्लाई में कमी आ जाती है। जानकारों का मानना है कि बायो-बिटुमेन या स्थानीय उत्पादन ही लंबे समय में इसका स्थायी समाधान हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए यह रिलीफ एक सकारात्मक कदम है, जिससे प्रोजेक्ट्स की गति बनी रहती है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह केवल एक अस्थायी उपाय है। सीमेंट, स्टील और फ्यूल जैसे अन्य इनपुट्स की महंगाई अभी भी एक जोखिम बनी हुई है। सरकार की ओर से आने वाला आधिकारिक नोटिफिकेशन ही कंपनियों के भविष्य और लिक्विडिटी के लिए स्पष्टता लाएगा।
