केंद्र सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए **₹10,000 करोड़** के एक नए ग्रोथ फंड को मंजूरी दी है। यह फंड पारंपरिक कर्ज के बजाय इक्विटी (Equity) के जरिए पैसा देगा, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को विस्तार करने में बड़ी मदद मिलेगी।
अब कर्ज नहीं, सरकार बनेगी पार्टनर
यूनियन कैबिनेट ने इस नई पॉलिसी को मंजूरी देकर SME सेक्टर के लिए फंडिंग का नजरिया बदल दिया है। अब तक सरकार केवल सब्सिडी या लोन देती थी, लेकिन इस ₹10,000 करोड़ के फंड के जरिए सरकार कंपनियों में हिस्सेदारी यानी इक्विटी (Equity) लेगी। इसका सीधा मतलब है कि सरकार अब महज एक कर्जदाता नहीं, बल्कि एक निवेशक की तरह काम करेगी।
क्यों है यह फैसला अहम?
मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए बैंक से लॉन्ग-टर्म लोन लेना हमेशा से मुश्किल रहा है, क्योंकि हर महीने का ईएमआई (EMI) बोझ कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव डालता है। सरकार का यह कदम 'पेशेंट कैपिटल' (Patient Capital) के रूप में काम करेगा, जो कंपनियों को बिना किसी तुरंत लोन भुगतान के दबाव के विस्तार करने में मदद करेगा।
फंड की बारीकियां और निवेशकों के लिए संकेत
- कुल फंड: ₹10,000 करोड़ का है, लेकिन इस फाइनेंशियल ईयर के लिए फिलहाल ₹500 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
- स्ट्रक्चर: इसे एक अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) की तरह बनाया जाएगा, जिसे प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स संभालेंगे।
- इक्विटी डाइल्यूशन: यह उन कंपनियों के लिए एक बड़ा बदलाव है जो अपनी ओनरशिप (Ownership) बचाए रखना चाहती हैं। प्रमोटरों को यह तय करना होगा कि ग्रोथ कैपिटल के बदले अपनी हिस्सेदारी कम करना उनके बिजनेस के लिए कितना फायदेमंद है।
फिलहाल, सरकार ने अभी तक कंपनी के वैल्यूएशन, एप्लीकेशन प्रोसेस और फंड के नियमों का खुलासा नहीं किया है। इंडस्ट्री को अब मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस (Ministry of Finance) की ओर से विस्तृत गाइडलाइंस का इंतजार है, जो यह तय करेंगी कि कौन सी कंपनियां इस स्कीम के लिए एलिजिबल होंगी और फंड का डिप्लॉयमेंट कैसे होगा।
