Fertilizer Subsidy: सरकार के डिजिटल पायलट प्रोजेक्ट का कमाल, बचाए **₹1,470 करोड़**

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AuthorNeha Patil|Published at:
Fertilizer Subsidy: सरकार के डिजिटल पायलट प्रोजेक्ट का कमाल, बचाए **₹1,470 करोड़**

केंद्र सरकार के डिजिटल फर्टिलाइजर सेल्स पायलट प्रोजेक्ट ने खरीफ 2026 सीजन में सरकारी खजाने के **₹1,470 करोड़** बचाए हैं। लैंड होल्डिंग के आधार पर खरीदारी को सीमित कर फर्टिलाइजर की खपत में **28%** की कमी दर्ज की गई है।

डिजिटल क्रांति से बचत

सरकार का यह पायलट प्रोग्राम देश के 222 जिलों में लागू किया गया है। इस डिजिटल सप्लाई चेन के जरिए फर्टिलाइजर की बिक्री को अब जमीन के रिकॉर्ड और फसल की जरूरतों से जोड़ा गया है, जिससे अवैध बिक्री और बर्बादी पर लगाम लगी है। भारत का फर्टिलाइजर सब्सिडी बिल सालाना ₹3 लाख करोड़ के पार जाने का अनुमान है, जिसे नियंत्रित करना सरकार की बड़ी प्राथमिकता है।

खपत में भारी गिरावट, किसानों तक पहुंच में सुधार

आंकड़ों पर गौर करें तो इस पायलट प्रोग्राम वाले जिलों में फर्टिलाइजर की बिक्री 13.35 लाख टन रही, जो पिछले साल इसी अवधि में 18.30 लाख टन थी। यानी कुल खपत में 28% की गिरावट आई है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इससे किसानों को खाद मिलने में कोई समस्या नहीं हुई। इसके विपरीत, सिस्टम का इस्तेमाल करने वाले किसानों की संख्या बढ़कर 46.97 लाख तक पहुंच गई है, जो यह दर्शाता है कि अब खाद सही और असली हकदार किसानों तक पहुंच रही है।

राज्यों का मिला-जुला रिस्पॉन्स

यह योजना स्वैच्छिक है, जिसके कारण राज्यों की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में खपत में बड़ी गिरावट देखी गई है, जो बर्बादी को रोकने में सफलता का संकेत है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में स्थानीय किसानों के विरोध के कारण प्रोग्राम को रोकना पड़ा, जबकि पंजाब ने इस पायलट में हिस्सा ही नहीं लिया। अब देखना यह है कि क्या सरकार बाकी राज्यों को इस डिजिटल ढांचे के लिए राजी कर पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.