हवाई कंपनियों पर बढ़ते बोझ को देखते हुए सरकार **₹10,000 करोड़** का 'प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड' फिर से शुरू करने पर विचार कर रही है। एटीएफ (ATF) की बढ़ती कीमतों से एयरलाइंस के ऑपरेटिंग बजट का **60%** हिस्सा खर्च हो रहा है, जिससे टिकटों के दाम बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
एटीएफ की बढ़ती कीमतें और एयरलाइंस का बोझ
जेत फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेजी एयरलाइंस के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। मौजूदा समय में एटीएफ का खर्च एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 55% से 60% तक पहुंच गया है, जबकि पहले यह 30% से 40% के दायरे में रहता था। कीमतों के ₹137 प्रति लीटर के स्तर पर बने रहने से कंपनियों के मुनाफे पर भारी दबाव है। इस बोझ को कम करने के लिए IndiGo जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने हाल ही में फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस लगातार सरकार से इंटरनेशनल बेंचमार्किंग के बजाय 'कॉस्ट-प्लस' प्राइसिंग मॉडल अपनाने की मांग कर रही है।
नवी मुंबई एयरपोर्ट ट्रांजिशन पर सबकी नजर
एयरलाइंस केवल फ्यूल के संकट से ही नहीं जूझ रहीं, बल्कि उनके सामने नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ट्रांजिशन की चुनौती भी है। 26 अक्टूबर 2026 की डेडलाइन के आसपास काम पूरा करने के लिए Adani Airport Holdings और एयरलाइन ऑपरेटर्स पर दबाव है। हालांकि, इसे आगे बढ़ाने पर भी चर्चा चल रही है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह बदलाव सुचारू रूप से होता है या इसमें कोई बड़ी ऑपरेशनल बाधा आती है।
GST सिस्टम में बड़ा बदलाव
इसके साथ ही फाइनेंस मिनिस्ट्री ने करीब 73.5 लाख टैक्सपेयर्स के लिए 'फेसलेस GST असेसमेंट' की प्रक्रिया शुरू की है। यह एडमिनिस्ट्रेटिव सुधार बड़ी कंपनियों और मैन्युफैक्चरर्स के लिए कंप्लायंस की मुश्किलों को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो बिजनेस एनवायरनमेंट को स्थिर बनाने में मदद करेगा।
