सरकार नवंबर 2026 में फ्यूल के दाम बढ़ाने पर विचार कर रही है। राज्य विधानसभा चुनावों से पहले होने वाली यह बढ़ोतरी रिटेल महंगाई को RBI की **6%** की लिमिट के पार ले जा सकती है, जिससे आने वाली पॉलिसी मीटिंग्स में रेपो रेट बढ़ने का खतरा है।
भारतीय सरकार नवंबर 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन पर विचार कर रही है। नीति निर्माता इसे शुरुआती 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के अभियान शुरू होने से पहले कीमतों को एडजस्ट करने का आखिरी मौका मान रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य चुनाव चक्र की राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच वित्तीय बोझ को नियंत्रित करना है।\n\n### महंगाई पर होगा सीधा असर\nआर्थिक दृष्टिकोण से फ्यूल की कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी रिटेल इन्फ्लेशन (महंगाई) पर दबाव डालेगी। अनुमान है कि यह कदम महंगाई दर को मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की आखिरी तिमाही में 6.2% तक ले जा सकता है, जो 2027 की पहली तिमाही तक 6.5% तक पहुंच सकती है। यह स्तर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की 6% की ऊपरी टॉलरेंस लिमिट से अधिक है, जो केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी के रास्ते को कठिन बना देगा।\n\n### रेपो रेट और मार्केट पर संकट\nयदि फ्यूल की कीमतें बढ़ती हैं, तो RBI महंगाई पर लगाम लगाने के लिए अधिक सख्त (Hawkish) रुख अपना सकता है। बाजार जानकारों का मानना है कि दिसंबर और फरवरी की मीटिंग्स में 25 बेसिस पॉइंट्स तक रेपो रेट में बढ़ोतरी संभव है। शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है। बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटोमोटिव जैसे सेक्टर, जो ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील होते हैं, उन पर इसका सबसे बुरा असर पड़ सकता है क्योंकि कर्ज की महंगी लागत से कंज्यूमर डिमांड घट सकती है।\n\nफिलहाल, निवेशकों को Ministry of Petroleum and Natural Gas की आधिकारिक घोषणाओं और RBI के महंगाई पर आने वाले बयानों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
